शारदा अस्पताल में बिलिंग को लेकर बवाल: परिजनों और बाउंसरों के बीच धक्का-मुक्की, वीडियो वायरल, निजी अस्पतालों की मनमानी पर उठे सवाल

ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। शुक्रवार को अस्पताल परिसर में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब एक मरीज के परिजनों और अस्पताल के बाउंसरों के बीच बिल को लेकर जमकर नोकझोंक हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर मरीज के उपचार में लापरवाही बरतने और कई बार कहने के बावजूद बिल तैयार न करने का आरोप लगाया। यह मामला उस समय और तूल पकड़ गया जब घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल होने लगा।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, जब परिजनों ने डिस्चार्ज की प्रक्रिया शुरू करने के लिए बिल बनाने की मांग की, तो अस्पताल प्रशासन की ओर से देरी की गई। इसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो बाद में विवाद में बदल गई। परिजनों का कहना था कि वे काफी देर से बिल की मांग कर रहे थे लेकिन अस्पताल स्टाफ ने उनकी बात को टालते रहे। बाउंसरों और परिजनों के बीच तीखी बहस हुई, जो धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। इस दौरान वहां मौजूद अन्य मरीज और उनके परिजन भी सहम गए।अस्पताल परिसर में मचे इस हंगामे से उपचाराधीन अन्य मरीजों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।वायरल वीडियो में बताया जा रहा है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने अपने बाउंसरों को बुला लिया। इसके बाद घटना और अधिक भड़क गई तथा माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया।

काफी देर बाद शांत हुआ मामला

काफी देर तक हंगामे के बाद बिलिंग प्रणाली ठीक की गई, तब जाकर माहौल शांत हुआ। शोर-शराबे के कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि बाद में अस्पताल प्रशासन ने किसी तरह स्थिति को शांत कराया। आयुष्मान कार्ड धारकों के साथ भी भेदभाव के आरोप, यह पहली बार नहीं है जब शारदा अस्पताल विवाद में आया हो। इससे पहले भी अस्पताल पर आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों के साथ भेदभाव के आरोप लग चुके हैं। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर ओमिक्रोन निवासी एक बुजुर्ग व्यक्ति पैर में फ्रैक्चर होने के बाद शारदा अस्पताल पहुंचे थे। परिवार ने आयुष्मान कार्ड दिखाकर निःशुल्क इलाज की उम्मीद की थी। हालांकि परिजनों का आरोप है कि अस्पताल कर्मियों ने इलाज के लिए पैसे मांगे और बाहर से दवाइयां खरीदने को कहा। पीड़ित ने आरोप लगाया कि अस्पताल के बाउंसर ने उसका मोबाइल छीनने की कोशिश की। इस घटना ने आयुष्मान भारत योजना और प्राइवेट अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया पर जनाक्रोश

वायरल वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों में भारी आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि जिन अस्पतालों में मरीज़ अपनी जान बचाने आते हैं, वहां उनके परिजनों को बाउंसरों का सामना करना पड़े, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। लोग स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन और विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि मरीजों और उनके परिजनों के साथ पारदर्शिता और संवेदनशील व्यवहार जरूरी है, खासकर गंभीर परिस्थितियों में। इस तरह की घटनाएं स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अस्पतालों में बाउंसरों की तैनाती सुरक्षा के लिए होती है, न कि मरीजों के परिजनों को डराने या उनसे बहस करने के लिए। इस घटना से स्पष्ट है कि निजी अस्पतालों में शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) अत्यंत कमज़ोर है।

अस्पताल प्रबंधन की चुप्पी

इस पूरे मामले पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अमर उजाला सहित कई मीडिया संस्थानों द्वारा संपर्क किए जाने पर प्रबंधन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

पृष्ठभूमि: बार-बार सुर्खियों में रहा है यह अस्पताल

ग्रेटर नोएडा का शारदा अस्पताल NCR का एक प्रमुख बहु-विशेषज्ञता अस्पताल है, जो NABH और NABL मान्यता प्राप्त है। बावजूद इसके, पिछले कुछ महीनों में यह अस्पताल बिलिंग विवाद, आयुष्मान कार्ड धारकों से भेदभाव और बाउंसरों के आक्रामक व्यवहार को लेकर कई बार सुर्खियों में आ चुका है। यह घटनाएं न केवल अस्पताल की साख पर सवाल उठाती हैं, बल्कि समूचे निजी स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

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