दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स अकाउंट पर अंतरिम राहत देने से इनकार किया, ब्लॉकिंग ऑर्डर की समीक्षा का आदेश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट को तुरंत बहाल करने से इनकार कर दिया। अदालत ने केंद्र सरकार और एक्स प्लेटफॉर्म से जवाब मांगे हैं तथा ब्लॉकिंग आदेश की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को तय की गई है।

कॉकरोच जनता पार्टी एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन है, जिसकी शुरुआत 16 मई 2026 को Boston यूनिवर्सिटी के छात्र अभिजीत दीपके ने की थी। यह सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत द्वारा एक सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं को “कॉकरोच” कहे जाने वाली कथित टिप्पणी के विरोध में शुरू हुआ था। न्यायमूर्ति ने बाद में स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी फर्जी डिग्री वाले कुछ व्यक्तियों के बारे में थी, न कि समूचे युवा वर्ग के बारे में। CJP ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की। इसका इंस्टाग्राम पेज कुछ दिनों में 2 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स तक पहुंच गया, जो भाजपा के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से भी आगे निकल गया। पार्टी बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक, किसान मुद्दों और युवाओं की निराशा पर व्यंग्यात्मक मीम्स और पोस्ट के जरिए चर्चा में रही। 21 मई को केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के इनपुट पर राष्ट्रीय सुरक्षा के हवाले से CJP के मूल एक्स अकाउंट (@CJP_2029) को भारत में ब्लॉक करवा दिया। इसके बाद बैकअप अकाउंट (@Cockroachisback) भी ब्लॉक हो गया। दीपके ने दावा किया कि उनके इंस्टाग्राम अकाउंट हैक हो गए और वेबसाइट भी डाउन कर दी गई।

आज की सुनवाई:

न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ के समक्ष याचिका पेश की गई। याचिकाकर्ता की ओर से वकीलों ने तर्क दिया कि ब्लॉकिंग आदेश अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है और यह राजनीतिक व्यंग्य को दबाने का प्रयास है। अदालत ने कुछ पोस्ट्स को “थोड़ा आक्रामक” (slightly offensive) बताते हुए तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। साथ ही केंद्र और एक्स से विस्तृत जवाब मांगे तथा पूरे ब्लॉकिंग आदेश (संभवतः IT एक्ट की धारा 69A के तहत) की समीक्षा करने को कहा। अभिजीत दीपके ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह लड़ाई युवाओं की आवाज को दबाने के खिलाफ जारी रहेगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर समर्थन जुटाने की अपील की।

पृष्ठभूमि:

CJP ने युवाओं में भारी आकर्षण पैदा किया, लेकिन साथ ही फेक फॉलोअर्स, विदेशी बॉट्स और व्यावसायिक शोषण के आरोप भी लगे। सुप्रीम कोर्ट में भी CJP के खिलाफ CBI जांच की मांग वाली याचिकाएं दायर की गई हैं, जिन्हें अदालत ने तत्काल सुनवाई देने से इनकार कर दिया था।यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सोशल मीडिया पर सरकारी नियंत्रण और युवा असंतोष के बीच संतुलन का प्रतीक बन गया है। 6 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में इस मुद्दे पर अंतिम फैसला आने की संभावना है।

विश्लेषण:

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत अंततः ब्लॉकिंग को गलत ठहराती है तो यह Section 69A के इस्तेमाल पर महत्वपूर्ण मिसाल बन सकती है। वहीं सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर नजर रखने की अपनी नीति का बचाव कर रही है।

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