ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच युद्धविराम (सीजफायर) को और 60 दिनों तक बढ़ाने तथा हार्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन पर लगी पाबंदियां हटाने का समझौता हो गया है। यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी पर निर्भर है। दोनों पक्षों के सूत्रों ने रॉयटर्स को यह जानकारी दी। समझौते के तहत हार्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा प्रभावित होने से बच सकेगा। इसके अलावा अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकाबंदी हटाएगा और ईरानी तेल निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में ढील देगा। समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत भी शामिल है।
हालिया झड़पों के बीच नाजुक समझौता
यह विकास ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों के बीच सीमित लेकिन तीखी झड़पें हुई हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदर अब्बास में ड्रोन हमले रोके और एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को निशाना बनाया। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की। कुवैत ने ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को रोकने का दावा किया। इन घटनाओं ने युद्धविराम की नाजुकता को उजागर किया है।अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने कहा, “हम अभी वहां नहीं पहुंचे हैं, लेकिन बहुत करीब हैं और हम इस पर काम करते रहेंगे।” उन्होंने आशा जताई कि समझौता सफल होगा, हालांकि कोई गारंटी नहीं दी। ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने कहा कि समझौते का मसौदा अभी अंतिम रूप से तैयार नहीं हुआ है।
पृष्ठभूमि
फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुए संघर्ष में हजारों लोग मारे जा चुके हैं और वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुए हैं। अप्रैल की शुरुआत में दो सप्ताह का अस्थायी सीजफायर हुआ था, जिसे अब विस्तारित करने की कोशिश की जा रही है। ट्रंप प्रशासन ने कई बार दावा किया है कि शांति करीब है, लेकिन ईरान ने अक्सर इन दावों को कमतर बताया है।
ईरान का कहना है कि किसी भी स्थायी समझौते में अमेरिकी प्रतिबंध हटाए जाएं, उसके विदेशी संपत्ति अनफ्रीज की जाए और क्षेत्र से अमेरिकी सैनिक हटाए जाएं। वहीं अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की मांग कर रहा है।
तेल बाजार पर असर
समझौते की खबर से तेल की कीमतों में गिरावट आई है। हार्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल और एलएनजी का प्रमुख मार्ग है। ओमान को लेकर भी तनाव है, जहां अमेरिका ने चेतावनी दी है कि वह ईरान के साथ कोई टोल सिस्टम न लगाए।
भविष्य की चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि यह 60 दिन का विस्तार स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेद बने हुए हैं। पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। ट्रंप ने पहले कहा था कि अगर ईरान के साथ सौदा नहीं हुआ तो “दूसरा रास्ता” अपनाया जाएगा। फिलहाल बाजार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समझौते की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं, जो पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

