पेट्रोल-डीजल-सीएनजी की कीमतों में फिर बढ़ोतरी, महंगाई का अटैक

देशभर में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में एक बार फिर उछाल आया है। मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में चल रहे संघर्ष, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की अस्थिरता और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण तेल विपणन कंपनियों ने मई के मध्य से अब तक कई चरणों में बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी से आम उपभोक्ता, परिवहन क्षेत्र और व्यवसायों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। दिल्ली में आज पेट्रोल की कीमत ₹99.51 प्रति लीटर और डीजल ₹92.49 प्रति लीटर पहुंच गई है। यह 15 मई को ₹3 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी के बाद 19 मई को हुई लगभग 80-90 पैसे की अतिरिक्त वृद्धि का नतीजा है। कुल मिलाकर मध्य मई से अब तक पेट्रोल-डीजल में करीब ₹5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है।

सीएनजी पर भी असर

सीएनजी की कीमतों में भी दो चरणों में वृद्धि हुई है। दिल्ली-एनसीआर में इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने हाल ही में ₹2-3 प्रति किलो की बढ़ोतरी की, जिससे दिल्ली में सीएनजी की कीमत ₹80 प्रति किलो के आसपास पहुंच गई है।इससे ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और निजी वाहनों वाले लाखों लोगों पर सीधा असर पड़ेगा।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85-88% आयात करता है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, यह निर्भरता 88.6% तक पहुंच गई है। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित हुआ, जिससे आपूर्ति बाधित हुई और ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर चली गईं।

वैश्विक कारक: क्रूड ऑयल की कीमतों में 40% की तेजी (फरवरी से अब तक)।

घरेलू दबाव: तेल कंपनियां घाटे में बिक्री कर रही थीं। चार साल बाद पहली बार बड़े पैमाने पर कीमतें बढ़ाई गईं।

आयात विविधीकरण: भारत अब 40 देशों से तेल आयात करता है, लेकिन मध्य पूर्व पर निर्भरता अभी भी महत्वपूर्ण है। रूस वर्तमान में प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

परिवहन: बस, ट्रक, टैक्सी किराए में बढ़ोतरी संभव।
महंगाई: खाद्य पदार्थों, किराना और अन्य सामानों की ढुलाई महंगी होने से मुद्रास्फीति बढ़ सकती है।
व्यवसाय: लॉजिस्टिक्स, कैब सेवाएं और छोटे उद्योग प्रभावित होंगे। विपक्षी दलों ने इस बढ़ोतरी की आलोचना की है। आम जनता इसे चुनाव के बाद की “लूट” बता रही है। सरकार की ओर से अभी कोई राहत पैकेज घोषित नहीं किया गया है, हालांकि कुछ राज्यों में स्थानीय करों में समायोजन की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों की राय: विशेषज्ञ चिंता जाहिर कर रहे हैं कि यदि वैश्विक तनाव जारी रहा तो और बढ़ोतरी हो सकती है। उपभोक्ताओं को ईंधन संरक्षण, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख करने की सलाह दी जा रही है। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार को दीर्घकालिक समाधान जैसे घरेलू उत्पादन बढ़ाने, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और रणनीतिक भंडारण पर जोर देना चाहिए।

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