गंगा में बिरयानी विवाद, हाईकोर्ट से 8 को जमानत, 6 की याचिका पर आज सुनवाई 

दो महीने बाद भी सुलग रहा है काशी का यह मामला, रंगदारी के आरोपों पर भी अदालत ने उठाए सवाल, कहा  ‘आरोपियों ने जताया सच्चा पछतावा’, धर्म और आस्था की नगरी काशी की पावन गंगा में रमजान के पाक महीने में नाव पर इफ्तार पार्टी करने और चिकन बिरयानी के अवशेष नदी में फेंकने का जो विवाद मार्च में उठा था, वह दो महीने बाद भी न्यायालय के गलियारों में जिंदा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में गिरफ्तार 14 आरोपियों में से 8 को जमानत दे दी है, जबकि शेष 6 आरोपियों की याचिकाओं पर आज — 18 मई को — सुनवाई निर्धारित है।

घटना क्या थी: वायरल वीडियो से उठी चिंगारी

16 मार्च 2026 को पंचगंगा घाट के पास गंगा की बीच धारा में एक नाव पर कुछ युवक इफ्तार मना रहे थे। वीडियो में वे बड़े पतीले से चिकन बिरयानी खाते और हड्डियां व खाने के बचे हुए हिस्से गंगा में फेंकते दिख रहे हैं।  यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और देखते ही देखते सांप्रदायिक-धार्मिक विमर्श का केंद्र बन गया। सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए आरोपियों ने अस्सी घाट से नमो घाट के बीच चलती नाव पर यह इफ्तार पार्टी की थी।

FIR और गिरफ्तारी: कैसे बढ़ा मामला

भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि एक समुदाय के कुछ युवकों ने गंगा के बीच नाव पर इफ्तार करते हुए न केवल मांसाहारी भोजन किया, बल्कि उसका बचा हुआ हिस्सा नदी में फेंककर धार्मिक भावनाओं को आहत किया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने वायरल वीडियो की जांच शुरू की।  एसीपी कोतवाली के मुताबिक, शुरुआती जांच में नाव पर बड़े पतीले से चिकन बिरयानी खाने की बात पुख्ता हुई। ये युवक राजेंद्र प्रसाद घाट से नाव पर सवार हुए थे और पंचगंगा घाट तक इफ्तार पार्टी करते हुए पहुंचे थे। पुलिस ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और गंगा की पवित्रता भंग करने का मामला माना। आरोपी ज्यादातर मदनपुरा इलाके के रहने वाले मुस्लिम युवक थे, जिनकी पहचान वीडियो से हुई। एक नाव संचालक (हिंदू) भी गिरफ्तार किया गया। आरोपियों पर धार्मिक भावनाएं भड़काने, सार्वजनिक उपद्रव और गंगा नदी को प्रदूषित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए।

ट्रायल कोर्ट से राहत नहीं, हाईकोर्ट पहुंचे आरोपी

वाराणसी की ACJM कोर्ट ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था और उनकी आपराधिक हिस्ट्री का विवरण भी मांगा था।  अप्रैल की शुरुआत में ट्रायल कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी, जिसके बाद आरोपियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट का आदेश: माफी के बाद मिली राहत

अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट की दो एकल पीठों ने आठ आरोपियों को राहत प्रदान की। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों की ओर से दाखिल एफिडेविट में घटना को लेकर माफी मांगी गई है। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें जमानत देने पर सहमति जताई। हालांकि अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अभी बाकी छह आरोपियों को राहत नहीं दी। जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला और जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच ने दानिश सैफी, आमिर कैफी और नुरुल इस्लाम समेत आठ याचियों को यह राहत दी।

नया मोड़: रंगदारी के आरोपों पर भी उठे सवाल

मामले में अब एक नया पहलू भी सामने आया है। इसी मामले में मुस्लिम नौजवानों के खिलाफ रंगदारी मांगने के आरोपों पर सवाल उठाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें संदिग्ध माना है। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों ने अपने हलफनामों में अपने कृत्य को लेकर सच्चा पछतावा जताया है।

विवाद के केंद्र में क्या है

यह मामला इसलिए बड़ा हो गया क्योंकि इसमें एक साथ कई संवेदनशील सवाल जुड़ गए गंगा की धार्मिक पवित्रता, सार्वजनिक स्थान पर भोजन के अवशेष फेंकने का कानूनी पहलू, और धार्मिक भावनाएं आहत करने की परिभाषा। कुछ लोगों ने सवाल उठाया है कि गंगा में शवों की आंशिक दाह के बाद अस्थियों का विसर्जन या दुर्गा पूजा-गणेश पूजा में मूर्तियों के विसर्जन  जिसमें प्लास्टर ऑफ पेरिस व रासायनिक रंगों से प्रदूषण होता है पर हर बार गिरफ्तारी नहीं होती। प्रशासन का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण के नियम सभी पर लागू हैं और कार्रवाई शिकायत तथा सबूतों के आधार पर होती है।

आज की सुनवाई पर निगाहें

शेष छह आरोपियों की याचिकाओं पर सुनवाई आगामी 18 मई को निर्धारित की गई है। आज के इस फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यह मामला केवल एक इफ्तार पार्टी का नहीं रहा यह उस बड़े सवाल का हिस्सा बन गया है कि धार्मिक संवेदनशीलता और कानूनी जवाबदेही के बीच की रेखा कहाँ खींची जाए, और वह रेखा सबके लिए एक जैसी हो।

यह भी पढ़ें: जस्टिस मनोज जैन करेंगे आबकारी नीति केस की सुनवाई, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा हटी

यहां से शेयर करें