New Education Policy : लखनऊ। नई शिक्षा नीति के तहत अब स्कूली शिक्षा को रोजगार और उद्योगों से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, असम और ओडिशा में कक्षा 6 से ही कौशल आधारित पढ़ाई शुरू करने की योजना बनाई है। इसे शुरुआती तौर पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा।
New Education Policy :
हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित बैठक में इन पांच राज्यों के अधिकारियों ने योजना की रूपरेखा तैयार की। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को शुरुआती स्तर से ही रोजगारपरक और व्यवहारिक शिक्षा देना है, ताकि वे भविष्य में उद्योगों और स्वरोजगार के लिए तैयार हो सकें।
स्कूलों में बनेंगी स्किल लैब
प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में फिलहाल कक्षा 9 से 12 तक ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ संचालित किया जा रहा है, जिसके तहत छात्रों को अत्याधुनिक तकनीकों और कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाता है। अब इसे और विस्तार देते हुए कक्षा 6 से ही स्किल एजुकेशन शुरू की जाएगी।
योजना के तहत स्कूलों को उद्योगों और कौशल विकास संस्थानों से जोड़ा जाएगा। साथ ही स्कूलों में स्किल लैब स्थापित की जाएंगी, जहां छात्रों को व्यवहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। इसमें आईटीआई और अन्य तकनीकी संस्थानों का भी सहयोग लिया जाएगा।
New Education Policy : तीन श्रेणियों में बांटे जाएंगे स्कूल
व्यावसायिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना के तहत स्कूलों को सामान्य, तकनीकी और मिश्रित मॉडल जैसी तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। इसके साथ ही छात्रों के लिए एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC) और नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF) को भी प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।
कई विभाग मिलकर करेंगे काम
इस महत्वाकांक्षी योजना में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, उद्योग, श्रम विभाग और जिला प्रशासन की भागीदारी होगी। इन सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाएगा।
राज्यों में इस योजना की निगरानी मुख्य सचिव स्तर पर की जाएगी, जबकि इसका समन्वय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय करेगा।
पढ़ाई के साथ रोजगार की तैयारी
योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों के लिए शिक्षा से रोजगार तक का रास्ता आसान बनाना है। सरकार का मानना है कि यदि छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ भी दें, तब भी उनके पास ऐसा कौशल हो जिससे वे रोजगार या स्वरोजगार शुरू कर सकें। वहीं इंटरमीडिएट तक पहुंचने वाले छात्र उद्योगों में काम करने के लिए पहले से तैयार होंगे।
योजना की खास बातें
- यूपी समेत पांच राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी शुरुआत
- करीब 600 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे
- स्कूलों में स्किल लैब और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होगा
- छात्रों को इंडस्ट्री आधारित प्रशिक्षण मिलेगा
- युवाओं को इंटरप्रेन्योरशिप के लिए भी तैयार किया जाएगा
- आईटीआई और तकनीकी संस्थानों से जोड़ा जाएगा प्रशिक्षण
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