तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय की तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, लेकिन बहुमत (118 सीटें) से 10 सीटें कम रहने के कारण सरकार गठन में देरी हो रही है। TVK ने 108 सीटें जीतीं, DMK को 59 और AIADMK को 47 सीटें मिलीं। यह ड्राविड़न दलों की दशकों पुरानी द्विध्रुवीयता को तोड़ने वाला ऐतिहासिक परिवर्तन माना जा रहा है।
कल (6 मई) विजय ने चेन्नई के लोक भवन में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने औपचारिक समर्थन पत्र (letters of support) मांगे हैं, जिनमें कम से कम 118 विधायकों का स्पष्ट समर्थन होना चाहिए। TVK ने कांग्रेस से समर्थन हासिल करने का दावा किया है, लेकिन AIADMK ने स्पष्ट रूप से समर्थन से इनकार कर दिया है। AIADMK ने आज गवर्नर से मुलाकात का समय मांगा है, जिससे सस्पेंस और बढ़ गया है।
AIADMK की रणनीति और आंतरिक कलह
AIADMK के डिप्टी कोऑर्डिनेटर के.पी. मुनुसामी ने कहा कि पार्टी विजय की TVK को किसी भी हालत में समर्थन नहीं देगी। हालांकि, पार्टी के अंदर बगावत की खबरें हैं। सूत्र बताते हैं कि AIADMK के कई विधायक (करीब 30 तक) स्वतंत्र रूप से TVK का समर्थन करने को तैयार हैं, जिसके चलते पार्टी की विधायक बैठक स्थगित कर दी गई। AIADMK ने DMK से भी गठबंधन की कोशिश की, लेकिन DMK ने इसे ठुकरा दिया। MK स्टालिन ने कहा है कि वे छह महीने तक “बिना दखल दिए” विपक्ष में रहेंगे।
सोशल मीडिया और आम जनता की प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया (विशेषकर X) पर इस मुद्दे पर जोरदार बहस छिड़ी हुई है।TVK समर्थक विजय की जीत को “नए तमिलनाडु की शुरुआत” और “ड्राविड़न दलों के भ्रष्टाचार व बेरोजगारी के खिलाफ जनादेश” बता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “विजय ने सिद्ध कर दिया कि सिनेमा स्टार से नेता बनना संभव है, अब सच्चे विकास का समय।” कई लोग कांग्रेस के समर्थन को पर्याप्त मान रहे हैं और जल्द शपथ ग्रहण की उम्मीद जता रहे हैं।
विपक्षी दलों के समर्थक सतर्क हैं। AIADMK समर्थकों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं—कुछ EPS (एडप्पादी पलानीस्वामी) की रणनीति की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ विधायकों की बगावत पर नाराजगी जता रहे हैं। एक पोस्ट में लिखा गया, “AIADMK अगर TVK को सपोर्ट करेगी तो सिद्धांतों का क्या? लचीलापन अच्छा नहीं।” DMK समर्थक स्टालिन की “शांतिपूर्ण विपक्ष” वाली रणनीति को सराह रहे हैं, लेकिन कई आम लोग सरकार गठन में देरी से परेशान हैं।
आम जनता में उम्मीद और अनिश्चितता दोनों हैं। चेन्नई और अन्य शहरों में चर्चा है कि TVK की युवा केंद्रित अपील (बेरोजगारी, शिक्षा, भ्रष्टाचार विरोध) ने युवाओं को आकर्षित किया, जिससे 85% से अधिक वोटिंग हुई। कई लोग कह रहे हैं, “अब देखते हैं विजय कितना बदलाव लाते हैं।” कुछ आशंका जता रहे हैं कि गठबंधन की राजनीति में TVK फंस सकती है और पुराने दल उसे कमजोर करने की कोशिश करेंगे।
ताजा अपडेट और आगे क्या?
राज्यपाल ने TVK को बहुमत साबित करने के लिए समय दिया है। आज AIADMK की गवर्नर से मुलाकात महत्वपूर्ण होगी। यदि TVK 118 का आंकड़ा जुटा लेती है (कांग्रेस + संभावित स्वतंत्र/अन्य समर्थन से), तो विजय जल्द CM पद की शपथ ले सकते हैं। अन्यथा, आगे की गठबंधन बातचीत या नए विकल्प खुल सकते हैं। यह चुनाव तमिलनाडु की राजनीति में मील का पत्थर साबित हो रहा है, जहां पहली बार गैर-ड्राविड़न पार्टी सबसे आगे है। जनता विकास, स्थिरता और नई शुरुआत की उम्मीद कर रही है, जबकि राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। स्थिति तेजी से बदल रही है—नजरें गवर्नर हाउस और सोशल मीडिया पर बनी हुई हैं।

