अरिहंत आर्डन की बालकनी में शॉर्ट सर्किट से लगी आग, मेंटेनेंस टीम ने बचाई जान; फिर उठा सवाल, 100 से ज़्यादा सोसाइटियां, फिर भी एक भी फायर स्टेशन नहीं

रात का सन्नाटा, गहरी नींद में सोए हजारों परिवार और तभी एक बालकनी से उठती आग की लपटें। ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित अरिहंत आर्डन सोसाइटी के टावर-एन की पांचवीं मंजिल के फ्लैट नंबर 503 की बालकनी में वाशिंग मशीन में शॉर्ट सर्किट के चलते आग लग गई। बृहस्पतिवार की सुबह करीब 3:50 बजे भड़की यह आग देखते-देखते फैलने लगी और बालकनी में रखी वाशिंग मशीन व अन्य सामान जलकर खाक हो गए।

कैसे हुई घटना की जानकारी?

घटना के समय फ्लैट में रहने वाले विवेक अपने घर पर ही थे। सोसाइटी का एक निवासी शादी समारोह से लौटते समय आग को देख लिया और उसने तुरंत फ्लैट मालिक को सूचना दी, जिसके बाद मेंटेनेंस टीम को अलर्ट किया गया। सुबह 4:07 बजे फायर विभाग को भी सूचना दी गई, जिसके बाद ईकोटेक-3 फायर यूनिट मौके के लिए रवाना हुई।

मेंटेनेंस टीम ने बड़ा हादसा टाला

दमकल टीम के पहुंचने से पहले ही सोसाइटी की मेंटेनेंस टीम ने फायर उपकरणों की मदद से आग पर काबू पा लिया था। यह सोसाइटी की सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया ही थी जिसने एक संभावित बड़े हादसे को रोका। सीएफओ प्रदीप चौबे ने बताया कि अगर समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो यह पूरे फ्लैट या टावर में फैल सकती थी। आग में कोई जनहानि नहीं हुई है।

बड़ा सवाल: 100 से अधिक सोसाइटियां, फिर भी एक भी फायर स्टेशन नहीं

यह घटना अकेली नहीं है। इससे महज दस दिन पहले ग्रेटर नोएडा की ला रेसिडेंसिया सोसाइटी में भी देर रात फ्लैट की बालकनी में आग लग गई थी। उस घटना में तीन दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, तब तक बिस्तर, सोफा, फ्रिज, एयर कंडीशनर और मोबाइल फोन सहित घर का अधिकांश सामान जलकर नष्ट हो चुका था। इन घटनाओं ने एक गहरे संस्थागत संकट को उजागर किया है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में 100 से अधिक सोसाइटियां और करीब पांच लाख की आबादी होने के बावजूद एक भी आधुनिक और समर्पित फायर स्टेशन नहीं है। किसी भी आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड को दूर-दराज से बुलाना पड़ता है, जिससे रिस्पांस टाइम बढ़ जाता है।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में 15 से लेकर 40 मंजिल तक की इमारतें आम बात हैं, लेकिन इन ऊंची इमारतों के अनुरूप आधुनिक फायर सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास नहीं हो पाया है। कई सोसाइटियों में फायर अलार्म, स्प्रिंकलर और हाइड्रेंट सिस्टम या तो सही तरीके से काम नहीं करते या उनकी नियमित जांच नहीं होती। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि फायर टेंडर ऊंची मंजिलों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाते। विशेषज्ञों का मानना है कि हाईराइज इमारतों में आग लगने की घटनाओं से निपटने के लिए विशेष उपकरण और प्रशिक्षित टीम की आवश्यकता होती है, जो फिलहाल पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं है।

स्थानीय संगठनों की आवाज, प्रशासन बेसुध

नेफोवा जैसे स्थानीय संगठनों ने कई बार इस मुद्दे को उठाया है और क्षेत्र में एक आधुनिक फायर स्टेशन बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यहां हाइड्रोलिक क्रेन, एडवांस्ड फायर फाइटिंग सिस्टम, उच्च क्षमता वाले वॉटर पंप और प्रशिक्षित स्टाफ की तत्काल आवश्यकता है।  लेकिन प्रशासन की प्राथमिकताओं में यह मांग अब तक नहीं आ सकी है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: आरोप-प्रत्यारोप का दौर

इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने योगी सरकार को घेरा। समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं ने कहा कि सरकार बुलडोजर चलाने में व्यस्त है, लेकिन लाखों लोगों की जान की सुरक्षा के लिए फायर स्टेशन तक नहीं बना सकती। कांग्रेस ने मांग की कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण तत्काल फायर ऑडिट कराए और हर बड़ी सोसाइटी में स्प्रिंकलर सिस्टम की जांच हो। बीएसपी ने कहा कि यह घटना सरकारी उपेक्षा का नतीजा है।सत्तापक्ष की तरफ से स्थानीय भाजपा नेताओं ने कहा कि घटना दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन सोसाइटी की मेंटेनेंस टीम की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। उन्होंने जल्द फायर स्टेशन की स्थापना के लिए प्राधिकरण से मांग उठाने की बात कही।

आम जनता में आक्रोश और भय

अरिहंत आर्डन के निवासी मनोज शर्मा ने कहा “रात के तीन-चार बजे अगर आग लग जाए और दमकल को आने में 15-20 मिनट लगें, तो सोचिए क्या होगा। हम किसके भरोसे हैं?” सोसाइटी की एक महिला निवासी ने बताया “हम रोज़ डर के साये में जीते हैं। बच्चे ऊपरी मंजिलों पर सोते हैं और हमारे पास एस्केप प्लान तक नहीं है।” पड़ोसी सोसाइटी के निवासी रमेश कुमार का कहना था “यह पहली घटना नहीं है और आखिरी भी नहीं होगी, जब तक यहां एक ठीकठाक फायर स्टेशन नहीं बनेगा।”

विशेषज्ञ की राय

फायर सेफ्टी विशेषज्ञों का कहना है कि हाईराइज बिल्डिंगों में “फायर मॉक ड्रिल” साल में कम से कम दो बार होनी चाहिए, रेज़िडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को फायर उपकरणों की नियमित जांच सुनिश्चित करनी चाहिए, और हर टावर में कम से कम दो फायर वार्डन नियुक्त होने चाहिए।

निष्कर्ष

लगातार बढ़ती आबादी और ऊंची इमारतों को देखते हुए अब पारंपरिक फायर सेफ्टी व्यवस्था पर्याप्त नहीं रह गई है। जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इस मुद्दे को गंभीरता से लें और ठोस कदम उठाएं।  अरिहंत आर्डन की यह घटना एक बार फिर चेतावनी बनकर आई है सुनेंगे तो बचेंगे, वरना अगली बार नुकसान सिर्फ सामान का नहीं, जान का भी हो सकता है।

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