45 निजी स्कूलों को फीस बढ़ोतरी के लिए नोटिस, राज्य की निर्धारित सीमा से अधिक वृद्धि का आरोप

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत नोएडा–ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में 45 निजी स्कूलों को नोटिस जारी किए गए हैं। जिला शुल्क विनियामक समिति (DFRC) की ओर से दिए गए नोटिस में इन संस्थाओं पर राज्य द्वारा निर्धारित 7.23 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने और अन्य अतिरिक्त शुल्क थोपने का आरोप लगाया गया है।

फीस नियम की दिशा में कार्रवाई

उत्तर प्रदेश सरकार ने 2018 में लागू “उत्तर प्रदेश स्व‑अर्थदायी स्वतंत्र स्कूल (शुल्क विनियमन) अधिनियम” के तहत निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी की स्पष्ट सीमा तय की है। DFRC की हाल की समीक्षा बैठक में यह तय हुआ कि 2026–27 सत्र के लिए फीस में अधिकतम 5 प्रतिशत और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर लगभग 7.23 प्रतिशत वृद्धि की अनुमति है। इस सीमा से अधिक वृद्धि करने वाले स्कूलों के खिलाफ पहले नोटिस और फिर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।

45 स्कूलों पर क्यों नोटिस?

सूत्रों के अनुसार, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कुल 195 से अधिक निजी स्कूलों में से 128 संस्थाओं ने उसी दर पर फीस बढ़ाई, जो DFRC द्वारा अनुशंसित अधिकतम 7.23 प्रतिशत के भीतर थी। हालांकि, बाकी 67 स्कूलों से फीस वृद्धि की विस्तृत जानकारी नहीं मांगी गई या वे समिति की दिशा‑निर्देशों का पालन नहीं कर पाए, जिसके बाद 45 संस्थानों को समझाने के लिए नोटिस जारी किए गए। इनमें कई स्कूलों के खिलाफ यह शिकायत दर्ज की गई है कि वे मूल ट्यूशन फीस के अतिरिक्त ट्रांसपोर्ट, ऐनुअल इवेंट्स, लैब चार्ज आदि शीर्षकों के नाम पर 10 से 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे थे।

अभिभावकों की शिकायतें और समिति की प्रतिक्रिया

नोएडा के अभिभावकों ने बार‑बार आरोप लगाया है कि कई निजी स्कूल “मनमानी फीस हिक” कर रहे हैं, कुछ संस्थाओं में वार्षिक शुल्क में 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी की गई। अखिल नोएडा स्कूल अभिभावक संघ के अध्यक्ष यतेंद्र कसाना ने कहा कि अगर स्कूल निर्धारित सीमा से अधिक लेते हैं तो अतिरिक्त राशि वापस या अगले सत्र में एडजस्ट की जानी चाहिए। DFRC की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर पहली बार उल्लंघन पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना, दोहराव पर 5 लाख रुपये तक का दंड, और लगातार उल्लंघन होने पर मान्यता या संबंधन रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है।

नए नियमों के बारे में दिशा‑निर्देश

समिति की ओर से मार्च 2026 में एक सर्कुलर जारी किया गया, जिसमें स्कूलों को निम्न बातों का पालन करने को कहा गया: फीस बढ़ोतरी की संपूर्ण ब्योरा पहले से जारी करना।पुस्तकें, यूनिफॉर्म, जूते आदि किसी विशेष वेंडर से खरीदने के लिए मजबूर न करना। चार्ज सिर्फ राज्य के नियमों के अनुरूप ही वसूलना। इसके अलावा, यह भी निर्देश दिया गया है कि नोएडा–ग्रेटर नोएडा के निजी स्कूल पांच साल तक नई यूनिफॉर्म या अतिरिक्त अनिवार्य शुल्क के लिए नई नीतियां न बनाएं।

आगे की कार्रवाई की संभावना

अधिकारियों का कहना है कि नोटिस प्राप्त करने वाले स्कूलों को स्पष्टीकरण देने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है। इस अवधि में यदि कोई संस्था अपनी ओर से संतोषजनक तर्क नहीं देती या जांच में गड़बड़ी पाई जाती है तो उस पर दंडात्मक कार्रवाई और फीस वापसी के आदेश दिए जांच की संभावना है। इस पूरे मामले में अभिभावकों को सलाह दी गई है कि यदि किसी स्कूल में निर्धारित सीमा से अधिक फीस मांगी जा रही हो, तो वे District Fee Regulatory Committee को तुरंत शिकायत दर्ज करवाएं, ताकि उनके भुगतान की पारदर्शिता सुनिश्चित रह सके।

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