समाज और सुरक्षा पर फिर उठे गंभीर सवाल, शादी के दौरान मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की कोशिश, छात्रा से छेड़खानी और ईव-टीजिंग का मामला

उत्तर प्रदेश के संभल और गाजियाबाद से सामने आए दो अलग-अलग मामलों ने नाबालिगों की सुरक्षा, सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं-लड़कियों की असुरक्षा और पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध ताज़ा खबरों के अनुसार, संभल के चंदौसी में एक शादी समारोह के दौरान नाबालिग के साथ दुष्कर्म की कोशिश का मामला सामने आया, जबकि गाजियाबाद के गरिमा गार्डन इलाके में छात्रा से छेड़खानी/ईव-टीजिंग के आरोप में पुलिस ने केस दर्ज किया है।

संभल में शादी समारोह के दौरान वारदात

संभल के चंदौसी क्षेत्र में एक शादी समारोह के दौरान एक मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की कोशिश का मामला सामने आया, जिसमें परिजनों ने समय रहते आरोपी को पकड़ लिया। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार की सतर्कता से बड़ी वारदात टल गई और आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजा गया। यह घटना इसलिए अधिक गंभीर मानी जा रही है क्योंकि सार्वजनिक और पारिवारिक आयोजन जैसी जगहें भी अब बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं दिख रहीं। इससे यह संदेश भी जाता है कि निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को सिर्फ घर तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक आयोजनों तक विस्तार देना होगा।

गाजियाबाद में छात्रा से छेड़खानी

गाजियाबाद के गरिमा गार्डन इलाके में छात्रा से छेड़खानी और ईव-टीजिंग का मामला सामने आया है। खबरों के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जिससे इलाके में लोगों के बीच नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ी हैं। ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज होने के बाद त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी होती है, क्योंकि देरी से पीड़िता का मनोबल टूटता है और आरोपियों का हौसला बढ़ सकता है। स्थानीय स्तर पर ऐसी घटनाएं यह भी दिखाती हैं कि स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए सुरक्षित आवागमन और पब्लिक-सेफ्टी तंत्र अभी भी कमजोर है।

एक ही तस्वीर के दो पहलू

दोनों घटनाएं अलग-अलग जिलों की हैं, लेकिन समस्या एक ही है—नाबालिगों और युवतियों की सुरक्षा को लेकर समाज और सिस्टम दोनों की परीक्षा। संभल में शादी समारोह के भीतर हुई वारदात और गाजियाबाद में सड़क/इलाके से जुड़ी छेड़खानी यह बताती हैं कि खतरा केवल सुनसान जगहों तक सीमित नहीं रह गया है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों से इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे कानून-व्यवस्था, निगरानी और त्वरित न्याय पर दबाव बढ़ रहा है। हालिया रिपोर्टों में संभल और गाजियाबाद दोनों जगह बच्चों और महिलाओं से जुड़े अपराधों पर अदालत, पुलिस और प्रशासन की सख्ती की चर्चा भी सामने आई है।

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