पुतला जलाते समय झुलसी भाजपा विधायक: अखिलेश यादव ने अपने पुतला जलाते समय झुलसी भाजपा विधायक अनुपमा जायसवाल से अस्पताल में की मुलाकात, ‘राजनीति अपनी जगह, इंसानियत अपनी जगह’

पुतला जलाते समय झुलसी भाजपा विधायक: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को लखनऊ के मेदांता अस्पताल पहुंचकर भाजपा विधायक अनुपमा जायसवाल का हालचाल जाना। अनुपमा जायसवाल बहराइच सदर से भाजपा विधायक हैं और शनिवार को बहराइच में ‘महिला जनाक्रोश मार्च’ के दौरान अखिलेश यादव और राहुल गांधी के पुतले जलाते समय अचानक भड़की आग की चपेट में आ गईं। उनके चेहरे पर गंभीर जलन हुई है, जिसमें चेहरे का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है। कान, माथा, भौंहें, नाक, होंठ और आंखों के कुछ हिस्से भी झुलस गए। वे आईसीयू में डॉ. निखिल पुरी की निगरानी में भर्ती हैं।

घटना शनिवार को बहराइच जिले में केंद्र सरकार के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण विधेयक) के समर्थन में आयोजित भाजपा के महिला विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई। प्रदर्शनकारियों ने विपक्षी नेताओं के पुतले फूंके। जब अनुपमा जायसवाल अखिलेश यादव का पुतला जलाने लगीं, तो अचानक लपटें तेज हो गईं और उनके चेहरे को अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगभग ब्लास्ट की तरह भड़की। उन्हें पहले जिला अस्पताल ले जाया गया, फिर बेहतर इलाज के लिए लखनऊ शिफ्ट किया गया।

अखिलेश यादव ने अस्पताल पहुंचकर अनुपमा जायसवाल और उनके परिवार से मुलाकात की, उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। मुलाकात के दौरान अनुपमा जायसवाल ने अखिलेश को देखकर मुस्कुराने की कोशिश की, जो अस्पताल की तस्वीरों में कैद हो गई।

अखिलेश यादव ने बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा:

“हम समाज में कलह की आग नहीं, सद्भाव और सौहार्द की वर्षा चाहते हैं। हमारी सकारात्मक राजनीति की स्वस्थ परंपरा ने हमें यही सिखाया है। इसलिए भाजपा विधायक श्रीमती अनुपमा जायसवाल जी से मिलने गए और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर लौटे। राजनीति अपनी जगह है, इंसानी रिश्तों का अपना महत्व है। सौहार्द बना रहे, सद्भाव बना रहे।

परिवार और भाजपा की प्रतिक्रिया

अनुपमा जायसवाल के पति अशोक जायसवाल ने अखिलेश यादव की इस मुलाकात की सराहना की। उन्होंने इसे “मानवीय संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक शिष्टाचार” का उदाहरण बताया। अशोक जायसवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी व्यस्त चुनावी कार्यक्रम (पश्चिम बंगाल प्रचार) के बावजूद विधायक से बात की और उनके इलाज के लिए जरूरी निर्देश दिए। भाजपा की ओर से राज्य अध्यक्ष पंकज चौधरी, विधानसभा स्पीकर सतीश महाना और लखनऊ महापौर सुषमा खरखवाल समेत कई नेता अस्पताल पहुंचे या परिवार से संपर्क में रहे। भाजपा जिलाध्यक्ष उपाध्यक्ष राहुल राय ने कहा कि पुतले में शायद ज्यादा पेट्रोल भरा गया था, जिससे अचानक fireball बन गई।

चुनावी राजनीति में पक्ष-विपक्ष की प्रतिक्रियाएं

यह घटना उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है। सपा समर्थक इसे अखिलेश यादव की उदारता और सकारात्मक राजनीति का उदाहरण बता रहे हैं। आम जनता के एक वर्ग ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “राजनीति में विरोध तो होता है, लेकिन इंसानियत ऊपर होनी चाहिए। अखिलेश जी ने अच्छा कदम उठाया।”

भाजपा की प्रतिक्रिया: भाजपा नेताओं ने अखिलेश की मुलाकात को सकारात्मक माना, लेकिन कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि पुतला दहन राजनीतिक विरोध का लोकतांत्रिक तरीका है और दुर्घटना किसी की गलती नहीं। पार्टी ने महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष की आलोचना जारी रखी और कहा कि भाजपा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। कुछ भाजपा नेता इसे “राजनीतिक स्टंट” भी बता रहे हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर सराहना ही हुई।

समाजवादी पार्टी: सपा ने अखिलेश के बयान को दोहराते हुए कहा कि “हम कलह नहीं, सद्भाव चाहते हैं।” पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे “बड़ी राजनीति” का उदाहरण करार दिया और विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे छोटी-छोटी घटनाओं को भी राजनीतिक रंग देने की कोशिश करते हैं।

कांग्रेस और अन्य: कांग्रेस ने महिला आरक्षण मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना जारी रखी, लेकिन इस घटना पर सीधा कमेंट नहीं किया। आम जनता में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं—कुछ इसे सच्ची इंसानियत बता रहे हैं, तो कुछ कह रहे हैं कि पुतला दहन जैसी प्रथाएं अब पुरानी होनी चाहिए क्योंकि ये कभी-कभी ऐसी दुर्घटनाएं पैदा कर देती हैं। चिकित्सकों के अनुसार जलन की पूरी गंभीरता 48-72 घंटे में स्पष्ट होती है। अनुपमा जायसवाल की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन प्लास्टिक सर्जरी और रिकंस्ट्रक्टिव ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है। यह घटना उत्तर प्रदेश की सियासत में विरोध और सद्भाव के बीच संतुलन की याद दिलाती है। जबकि राजनीतिक दल चुनावी मुद्दों पर एक-दूसरे पर हमलावर हैं, इस तरह की मुलाकातें आम जनता को संदेश देती हैं कि मतभेद के बावजूद मानवीय मूल्य बरकरार रखे जा सकते हैं।

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