ममता बनर्जी की ‘जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई’: घिरती TMC के सामने BJP का हमला, राघव चड्ढा का AAP से BJP जाना विपक्ष में सनसनी

ममता बनर्जी की ‘जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई’: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। मुस्लिम बहुल इलाकों में उच्च मतदान प्रतिशत के बावजूद, तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ‘घिरा हुआ’ बताया जा रहा है। उर्दू अखबारों में उन्हें “जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई” लड़ते दिखाया गया है, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने को ‘सिद्धांतों से समझौता’ और ‘छवि पर धब्बा’ करार दिया गया है।

उर्दू टाइम्स (मुंबई) ने लिखा है कि बंगाल चुनाव अब केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि दक्षिणपंथी ताकतों (BJP-RSS) के खिलाफ अस्तित्व की लड़ाई बन गई है। चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में लाखों मतदाताओं के नाम कटने, 2.4 लाख से अधिक केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती और रोकथामात्मक गिरफ्तारियों को “विपक्ष को दबाने की साजिश” बताया गया। मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में 92.9% तक मतदान को इन कदमों के खिलाफ जनता की प्रतिक्रिया माना गया। अखबार ने ममता को “लड़ाकू” करार देते हुए कहा कि यह चुनाव उनके राजनीतिक भविष्य की परीक्षा है।

आम जनता की प्रतिक्रियाएं

कोलकाता और ग्रामीण बंगाल में आम मतदाताओं में मिश्रित भावनाएं दिख रही हैं। TMC समर्थक, विशेषकर महिलाएं और अल्पसंख्यक समुदाय, ममता को “मां” और “लोकतंत्र की रक्षक” बता रहे हैं। एक 55 वर्षीय homemaker ने कहा, “ममता दीदी ने 2011 में वामपंथियों को हराया, अब BJP के खिलाफ लड़ रही हैं। विकास योजनाएं चलीं, लेकिन हिंसा और भ्रष्टाचार की शिकायतें भी हैं।” दूसरी ओर, BJP समर्थक युवा और कुछ हिंदू मतदाता बदलाव चाहते हैं। एक छोटे व्यापारी ने कहा, “15 साल हो गए, अब विकास चाहिए। रोजगार नहीं, घुसखोरी और तोलाबाजी बढ़ गई। मोदी जी एक मौका दें तो बंगाल बदल सकता है।” मुर्शिदाबाद और मालदा में अल्पसंख्यक मतदाताओं में SIR से नाम कटने का गुस्सा साफ दिखा, जिसे वे “वोट चोरी” बता रहे हैं।

राघव चड्ढा का स्विच और विपक्षी प्रतिक्रियाएं

हैदराबाद के सियासत अखबार ने राघव चड्ढा के AAP से BJP जाने को तीखे शब्दों में आलोचना की। चड्ढा समेत सात सांसदों (स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक, अशोक मित्तल आदि) के दो-तिहाई बहुमत के साथ भाजपा में विलय को “अवसरवाद” बताया गया। चड्ढा ने खुद को “सही आदमी, गलत पार्टी” बताया और AAP पर सिद्धांतों से भटकने, व्यक्तिगत फायदे और toxic वातावरण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संसद में बोलने नहीं दिया जाता था। AAP convener अरविंद केजरीवाल ने इसे “BJP की Operation Lotus” करार दिया और केंद्रीय एजेंसियों (ED-CBI) पर दबाव डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पंजाबियों के साथ फिर धोखा हुआ।” विपक्षी दलों ने चड्ढा की छवि को “धूमिल” बताते हुए कहा कि जो नेता 15 साल AAP को समर्पित रहकर लोकप्रिय हुआ, वह सत्ता के लालच में पार्टी छोड़ दे तो उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।

पक्ष और विपक्ष की प्रतिक्रियाएं

भाजपा ने ममता सरकार पर भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और कानून-व्यवस्था चरमराने के आरोप लगाए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने TMC कार्यकर्ताओं पर तीखे हमले किए, जिस पर ममता ने कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। भाजपा बंगाल में “परिवर्तन” का नारा दे रही है और पहले चरण के मतदान में अच्छे रुझानों का दावा कर रही है। TMC ने इसे “केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग” और “संवैधानिक संस्थाओं पर हमला” बताया। ममता बनर्जी ने BJP पर “दिल्ली और पहलगाम पहले सुधारो” कहकर पलटवार किया। उन्होंने अल्पसंख्यकों को आश्वासन दिया कि उनकी सुरक्षा और अधिकार TMC की प्राथमिकता है।

चुनावी संदर्भ

2026 बंगाल चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं (23 और 29 अप्रैल)। पहले चरण में उच्च मतदान दर्ज किया गया। परिणाम 4 मई को आने वाले हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह ममता बनर्जी के लिए “मेक या ब्रेक” चुनाव है। अगर TMC हारी तो उनकी पार्टी में टूट की आशंका जताई जा रही है। राघव चड्ढा का कदम 2027 पंजाब चुनाव से पहले BJP को मजबूती दे सकता है, लेकिन AAP को बड़ा झटका लगा है। उर्दू प्रेस ने कुल मिलाकर ममता को सहानुभूति और चड्ढा को निंदा के साथ कवर किया, जो विपक्षी खेमे में चल रही बहस को दर्शाता है। स्थिति अभी भी तरल है। आम जनता अब विकास, सुरक्षा, रोजगार और सांप्रदायिक सद्भाव जैसे मुद्दों पर वोट डाल रही है। बंगाल की जनता का फैसला कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।

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