AAP का किला ढहा: स्वाति मालीवाल BJP में शामिल, केजरीवाल पर लगाए गंभीर आरोप, राघव, हरभजन समेत 7 सांसदों ने थामा कमल

AAP का किला ढहा: 20 साल का साथ छोड़ा, बोलीं “घर में ही पिटवाया, संसद में बोलने नहीं दिया”। भारतीय राजनीति में एक बड़े भूकंप की तरह आई इस खबर ने देशभर में सियासी हलचल मचा दी है। आम आदमी पार्टी (AAP) की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने शनिवार को औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण कर ली। करीब दो दशक तक केजरीवाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के बाद मालीवाल ने यह कदम उठाया, जिसने AAP के राष्ट्रीय ढांचे को हिलाकर रख दिया है।

यह घटनाक्रम तब और बड़ा हो गया जब इससे एक दिन पहले ही AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल बीजेपी में शामिल हुए थे और उन्होंने दावा किया था कि स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता और विक्रमजीत साहनी भी जल्द BJP में आएंगे। इस ऐतिहासिक सियासी उलटफेर के बाद राज्यसभा में AAP के पास केवल 3 सांसद ही बचे हैं, जबकि सात नए सदस्यों के जुड़ने से भाजपा की राज्यसभा में कुल संख्या 113 हो गई है।

मालीवाल का भावुक पोस्ट — “आदर्शों से भटक गई AAP”

स्वाति मालीवाल ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “साल 2006 में अपनी नौकरी छोड़कर मैंने देश सेवा का मार्ग चुना था। RTI आंदोलन, अन्ना आंदोलन, आम आदमी पार्टी के गठन और दिल्ली महिला आयोग में 8 साल निष्ठापूर्वक काम किया। जिन सिद्धांतों और ईमानदार राजनीति के संकल्प के साथ हमने यह सफर शुरू किया था, आज बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि अरविंद केजरीवाल और उनके इशारे पर पूरी आम आदमी पार्टी उन आदर्शों से भटक चुकी है।”

BJP जॉइन करने के बाद दागे तीखे बाण

बीजेपी में शामिल होते ही मालीवाल ने केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मैं 2006 से केजरीवाल के साथ थी, उनके हर आंदोलन में साथ दिया, लेकिन उन्होंने अपने ही घर में मुझे एक गुंडे से पिटवाया। जब मैंने आवाज़ उठाई तो मुझे डराया और धमकाया गया। मुझ पर FIR वापस लेने का दबाव बनाया गया।” मालीवाल ने केजरीवाल को ‘महिला विरोधी’ करार देते हुए कहा कि पिछले दो सालों में उन्हें संसद में एक बार भी बोलने का मौका नहीं दिया गया। मालीवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का फैसला पूरी तरह अपनी इच्छा से लिया है, न कि किसी दबाव में। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उन्हें देश के लिए काम करने का बेहतर अवसर दिखाई देता है। मालीवाल ने नरेंद्र मोदी को वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली नेता बताते हुए कहा कि महिला आरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि जो भी रचनात्मक राजनीति करना चाहते हैं, वे बीजेपी से जुड़ें।

राघव चड्ढा की भूमिका — ‘मैंने ही किया था ऐलान’

AAP सांसद राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि “राज्यसभा में AAP के 10 सांसद हैं, उनमें से 2/3 से ज्यादा हमारे साथ हैं। उन्होंने हस्ताक्षर किए हैं और आज सुबह हमने हस्ताक्षरित पत्र और दस्तावेज राज्यसभा के सभापति को सौंप दिए। हमारे अलावा, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल भी हैं।” AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उप नेता के पद से हटाया था, इसके बाद 24 अप्रैल को राघव ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया। हैरान कर देने वाली बात यह रही कि अशोक मित्तल, जिन्हें राघव की जगह AAP ने राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाया था, उन्होंने भी पार्टी छोड़ दी।

AAP का पलटवार — “यह ऑपरेशन लोटस है, गद्दारी है”

आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता संजय सिंह ने इसे लोकतंत्र की हत्या और पंजाब की जनता के साथ गद्दारी करार दिया। उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाया कि उन्होंने पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले ‘ऑपरेशन लोटस’ को अंजाम दिया है। संजय सिंह ने कहा “इन सातों ने पंजाब की जनता की पीठ में छुरा घोंपा है। भगवंत मान सरकार अच्छा काम कर रही है, इसलिए ऑपरेशन लोटस खेला जा रहा है। अशोक मित्तल के घर ED का छापा पड़ा, भय दिखाया और तोड़ लिया।” संजय सिंह ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर इन सभी बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग करने की चेतावनी भी दी।

विपक्ष की प्रतिक्रिया — “लोटस बना लूट-अस”

कांग्रेस ने भी इस घटनाक्रम पर जोरदार तंज कसा और इसे ‘ऑपरेशन लोटस’ का हिस्सा बताया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा — “दुख की बात है, कुछ स्वार्थी लोगों ने हमें छोड़ा था। अब AAP और हम एक ही टीम में आ गए हैं। इस सरकार से गरीब ही लड़ सकता है।” उन्होंने ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स जैसी एजेंसियों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया।

सोशल मीडिया पर जनता का गुस्सा

जनता की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर बेहद तीखी रही। राघव चड्ढा के इंस्टाग्राम पर 24 अप्रैल को पार्टी छोड़ने की खबर आते ही अनफॉलो करने की होड़ मच गई और 24 घंटे के भीतर 11 लाख से ज्यादा यूजर्स ने उन्हें अनफॉलो कर दिया। सोशल मीडिया पर एक तबका जहाँ इसे ‘अवसरवादी राजनीति’ और ‘दलबदल’ बता रहा है, वहीं एक वर्ग मालीवाल के आरोपों को सही ठहराते हुए उनके साहस की तारीफ कर रहा है।

पृष्ठभूमि — दो साल पहले से जल रही थी बगावत की आग

जानकारों के अनुसार, पार्टी में दिख रही फूट की पहली दरार स्वाति मालीवाल ही हैं। मई 2024 से उनकी और पार्टी की दूरियां बढ़ीं। 2024 में जब केजरीवाल लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए जेल से कुछ दिन बाहर आए, तब मालीवाल उनसे मिलने गईं और उनके आवास पर बिभव कुमार ने उनके साथ हाथापाई का आरोप लगाया। यहीं से स्वाति पार्टी से दूर होती गईं और पार्टी के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट करती रहीं।

राजनीतिक विश्लेषण

इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक विशेषज्ञ 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में देख रहे हैं। AAP ने इसे ‘ऑपरेशन लोटस’ और गद्दारी करार दिया है। वहीं BJP इसे पार्टी में बढ़ते जनविश्वास के रूप में प्रस्तुत कर रही है। जो भी हो, इस राजनीतिक भूकंप के झटके आने वाले महीनों तक दिल्ली से पंजाब तक महसूस किए जाते रहेंगे।

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