श्री हनुमंत कथा: कुंडा से विधायक और जाने‑माने राजनीतिक व्यक्तित्व रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने हाल में बागेश्वर धाम सरकार पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री की हनुमान कथा कार्यक्रम में हिस्सा लिया और इस दौरान सनातन धर्म की रक्षा तथा हिंदू समुदाय के भीतर एकता स्थापित करने पर जोर दिया। पवित्र हनुमान कथा के दौरान राजा भैया ने भक्तों को आह्वान किया कि वे जाति, मतभेद और राजनीति के बंधनों से ऊपर उठकर धर्म संरक्षण के लिए एकजुट हों, ताकि सनातन परम्पराएं आगे बढ़ सकें।
धर्म की रक्षा पर जोर
राजा भैया ने अपने संबोधन में बताया कि सनातन धर्म पर आज भी विभिन्न तरह के हमले जारी हैं, जिसमें धर्मांतरण, धार्मिक संकेतों की अवहेलना और जातिगत भेदभाव शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को अपने आस्था स्थलों, त्योहारों और रीति‑रिवाजों को मजबूती से जोड़कर रखना होगा, क्योंकि धर्म ही राष्ट्र की पहचान और संस्कृति का आधार बनता है।
हिंदू एकता का आह्वान
कथा प्रांगण में उपस्थित विशाल भक्त‑समूह को संबोधित करते हुए राजा भैया ने स्पष्ट कहा कि जाति‑वर्ग और राजनीतिक विभाजन हिंदू समुदाय की शक्ति को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री की हनुमान कथा को एक ऐसा अवसर बताया, जिसके माध्यम से सभी हिंदू घरों में एक नया जागरण पैदा हो और धार्मिक भेदभाव के बजाय सामाजिक‑आध्यात्मिक एकता की भावना बढ़े।
बागेश्वर धाम के प्रति सम्मान
राजा भैया ने बाद में धीरेंद्र शास्त्री के प्रति सम्मानजनक भाव व्यक्त करते हुए कहा कि वे जिस तरह से देश‑विदेश के भक्तों के बीच सनातन का संदेश फैला रहे हैं, वह जानकारी और भक्ति का अद्वितीय मिश्रण है। इसके साथ ही उन्होंने पहले से लिए गए निवेदन को दोहराते हुए कहा कि 2025 महाकुंभ जैसे धार्मिक मेलों में भी बाबा बागेश्वर धाम की उपस्थिति से भक्त‑जनों को आध्यात्मिक लाभ मिलेगा और हिंदू समुदाय में अधिक एकता विकसित होगी।
स्थानीय समर्थन और राजनीतिक संदर्भ
प्रतापगढ़ जिले के भक्तों और स्थानीय नेताओं ने राजा भैया के इस कदम को सराहा है और कहा कि सत्ता से जुड़ा व्यक्तित्व भी धर्म‑आस्था के लिए सार्वजनिक मंच पर आगे आ रहा है, जो सामाजिक स्तर पर धार्मिक जागरण को बढ़ावा देगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की धार्मिक कार्यशालाओं और कथाओं में भाग लेना राजा भैया के निजी आस्था व जन‑आधार के साथ‑साथ उनकी राजनीतिक छवि को भी धर्म‑निष्ठ और समाजसेवी श्रेणी में खड़ा करता है। इस तरह राजा भैया की यह हनुमान कथा में भागीदारी केवल भक्ति की घटना नहीं, बल्कि आधुनिक समय में हिंदू समुदाय के लिए एकता, जागरण और धर्म‑संरक्षण का संकल्प लेने का भी प्रतीक बन गई है।

