महिला आरक्षण बिल पर संग्राम: संसद में गिरा विधेयक, सड़कों पर उतरा आक्रोश, पंकज चौधरी बोले, “परिवारवादी दलों को डर है नारी सशक्तीकरण से”

महिला आरक्षण बिल पर संग्राम: भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बुधवार को नोएडा में आयोजित प्रेस वार्ता में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध करके इन दलों ने देश की महिलाओं के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात किया है।

श्री चौधरी ने तीखे शब्दों में कहा महिलाएं संभालेंगी जिम्मेदारी, तो खत्म होगी पारिवारिक यारी।” उनका इशारा सीधे उन परिवारवादी दलों की ओर था जो यह समझते हैं कि महिलाओं को 33 प्रतिशत राजनीतिक भागीदारी मिल गई तो उनके वंशवादी राजनीतिक साम्राज्य का अंत निश्चित है।

पृष्ठभूमि: क्यों गरमाया है मुद्दा?

नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जो संसद के दोनों सदनों से दो साल पहले पास हो चुका था, उसके लागू होने पर हाल ही में कई सवाल खड़े हो गए। इस अधिनियम में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान है, जिसके लिए जनगणना और परिसीमन किया जाना जरूरी था। सरकार की ओर से इस संबंध में संविधान संशोधन बिल लोकसभा में पेश किया गया, लेकिन दो-तिहाई बहुमत के अभाव में वह गिर गया। बिल गिरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि “कल पूरे देश ने देखा कि कैसे नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया। मैं देश की माताओं-बहनों से माफी मांगता हूं।” उन्होंने विपक्ष को इसका जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि निजी हित राष्ट्र के हित से बड़ा हो गया है।

यूपी-बिहार में भाजपा का जन-आक्रोश अभियान

भाजपा ने लखनऊ में ‘जन आक्रोश महिला पद यात्रा’ निकाली, जो मुख्यमंत्री आवास से विधानभवन तक गई। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव मौर्य भी शामिल हुए। सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके के महिला विरोधी रवैये के खिलाफ देशभर में आक्रोश है और लखनऊ का मार्च उसी का प्रतीक है। बिहार में भी भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं ने पटना में बैठक कर विरोध का एलान किया और 20 अप्रैल को पटना सहित पूरे बिहार में आक्रोश मार्च निकाला।

नोएडा प्रेस वार्ता में पंकज चौधरी के प्रमुख बिंदु

श्री चौधरी ने कहा कि 2017 से पहले बहन-बेटियों की सुरक्षा उत्तर प्रदेश में एक गंभीर समस्या थी, लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद प्रदेश की तस्वीर बदली। उन्होंने बताया कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से राज्य में कामकाजी महिलाओं का अनुपात बढ़कर 36-37 प्रतिशत हो गया है। तीन तलाक कानून का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस मुस्लिम महिलाओं के “फर्जी पैरोकार” हैं — जिन दलों ने तीन तलाक कानून का विरोध किया था, वे आज मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग कर केवल अपनी “बांटने वाली मानसिकता” का परिचय दे रहे हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर तंज कसते हुए कहा, न तो नीयत है, न नीति है, बस केवल राजनीति है।”

आगे क्या?

भाजपा सरकार ने तय किया है कि महिला आरक्षण के मुद्दे को “आधी आबादी का अधिकार” के रूप में जनता के सामने रखा जाएगा। ब्लॉक स्तर से लेकर जिला मुख्यालयों तक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला चलाई जाएगी और महिला समूहों, स्वयं सहायता समूहों को जोड़कर इस अभियान को जनांदोलन का रूप दिया जाएगा। वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी मात्र 14-15 प्रतिशत है, जो विश्व स्तर के मुकाबले बहुत कम है। आरक्षण लागू होने के बाद यह संख्या एकदम से बढ़कर 33 प्रतिशत हो जाएगी। प्रेस वार्ता में नोएडा विधायक पंकज सिंह, प्रदेश महामंत्री सुभाष यदुवंशी, राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल सहित हजारों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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