नोएडा में फिर भड़की श्रमिक हिंसा: फेस-2 में भारी बवाल, पुलिस की गाड़ियाँ फूंकी और जमकर हुआ पथराव

नोएडा में फिर भड़की श्रमिक हिंसा: दिल्ली से सटे औद्योगिक शहर नोएडा में एक बार फिर तालाबंदी (Lockdown) के दौर की कड़वी यादें ताजा हो गई हैं। सोमवार को नोएडा के फेस-2 औद्योगिक क्षेत्र में वेतन वृद्धि और अन्य लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया, जिसके बाद इलाके में युद्ध जैसी स्थिति बन गई।

विरोध ने लिया उग्र रूप: आगजनी और तोड़फोड़

पिछले कई दिनों से नोएडा के विभिन्न औद्योगिक सेक्टरों में श्रमिक वर्ग अपनी मांगों को लेकर लामबंद था। आज सुबह फेस-2 इलाके में हजारों की संख्या में श्रमिक सड़कों पर उतर आए। स्थिति तब बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस शुरू हुई।

पुलिस पर हमला: उग्र भीड़ ने पुलिस टीम पर जमकर पत्थरबाजी की।

वाहनों में आग: उपद्रवियों ने पुलिस की एक पीसीआर वैन सहित कई वाहनों में तोड़फोड़ की और उनमें आग लगा दी

कंपनी संपत्तियों को नुकसान: कई निजी कंपनियों के गेट और खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए गए।

पुलिस की जवाबी कार्रवाई: आंसू गैस के गोले दागे

बिगड़ते हालात को देखते हुए भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। जब प्रदर्शनकारी शांत नहीं हुए और पथराव जारी रहा, तो पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले (Tear Gas) छोड़े और हल्का बल प्रयोग किया। पूरे फेस-2 क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। “स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हिंसा में शामिल लोगों की पहचान सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के जरिए की जा रही है। किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।” — स्थानीय पुलिस प्रशासन

प्रमुख मांगें जिन पर अड़े हैं श्रमिक

नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में तनाव का मुख्य कारण श्रमिकों की निम्नलिखित मांगें हैं:

  1. वेतन में वृद्धि: महंगाई के अनुपात में न्यूनतम वेतन को बढ़ाने की मांग।
  2. बकाया भुगतान: कई कंपनियों द्वारा पिछले कुछ महीनों का वेतन न देना।
  3. कार्य दशाएं: काम के घंटों को लेकर विवाद और बेहतर सुविधाओं की मांग।
  4. सुरक्षा और छंटनी: बिना नोटिस के काम से निकाले जाने का डर।

क्या फिर लौट रहे हैं पुराने हालात?

नोएडा में हुई यह हिंसा उस दौर की याद दिलाती है जब तालाबंदी के दौरान श्रमिकों का सब्र टूटा था। औद्योगिक संगठनों ने इस घटना पर चिंता जताई है, क्योंकि इस तरह की हिंसा से न केवल उत्पादन प्रभावित होता है, बल्कि निवेश पर भी बुरा असर पड़ता है। फिलहाल पुलिस ने इलाके में फ्लैग मार्च निकाला है और स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।

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