Amity student Harshit drowned in ‘death pit’: परीक्षा खत्म होने की खुशी मनाते-मनाते 23 वर्षीय हर्षित भट्ट की जिंदगी हमेशा के लिए रुक गई। अमिती यूनिवर्सिटी के फाइनल ईयर बीपीएड छात्र हर्षित 8 अप्रैल को दोस्तों के साथ नोएडा सेक्टर-94 के निर्माणाधीन गड्ढे (जिसे लोकल ‘डेथ पिट’ कहते हैं) में पिकनिक मनाने गए। पानी में तैरने उतरे तो कभी वापस नहीं लौटे। अब पूरा परिवार टूटा हुआ है, जबकि सोशल मीडिया पर जनता नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही पर भड़की हुई है।
परिवार का दर्द और मां का सीधा आरोप
हर्षित की मां दीपमाला (दीप माला) ने पोस्टमार्टम के बाद मोर्चरी में बेटे का शव देखकर रोते हुए कहा, “मेरा बेटा ट्रेंड स्विमर था, पानी का राजा कहलाता था। वह डिसिप्लिन्ड लड़का था, कोचिंग करियर बनाने वाला। लेकिन शव पर V-शेप के निशान पीठ पर, हाथ-पैरों पर काले घाव… लगता है किसी नुकीली चीज से मारा गया। मैं मानती हूं कि मेरे बेटे की हत्या हुई है। तीनों दोस्तों पर शक है।”
मां ने आगे कहा, “वह हर रोज एक ही समय घर से निकलता और लौटता था। कॉलेज के हर लेक्चरर ने उसे अच्छा और संस्कारी बताया। पुलिस की डूबने वाली थ्योरी पर भरोसा नहीं। न्याय चाहिए।” पिता (सेना में तैनात, लेह-लद्दाख से आए) ने अभी औपचारिक शिकायत नहीं दी, लेकिन परिवार पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। हर्षित इंदिरापुरम, गाजियाबाद के शिप्रा रिवेरा का रहने वाला था। उसके छोटी बहन और माता-पिता अब बेबस हैं।
सोशल मीडिया और आम जनता की प्रतिक्रिया
X (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर #JusticeForHarshit और #NoidaDeathPit ट्रेंड कर रहे हैं। लोग लगातार पूछ रहे हैं – “जनवरी में युवराज मेहता की मौत के बाद भी नोएडा अथॉरिटी ने गड्ढे सील क्यों नहीं किए? बैरिकेडिंग सिर्फ एक तरफ, दूसरी तरफ खुला रास्ता… ये मौत की साजिश नहीं तो क्या है?”
एक पड़ोसी ने IANS को बताया, “बहुत दर्दनाक हादसा है। लड़का तैरना जानता था। चार लड़के गए, तीन सुरक्षित, एक चला गया। जांच होनी चाहिए।” सोशल मीडिया यूजर्स लिख रहे हैं – “नोएडा में डेथ पिट्स कितनी जानें लेंगे? अथॉरिटी चुप क्यों? हर महीने नया हादसा।” इंस्टाग्राम रील्स में लोग पुराने हादसों की तस्वीरें शेयर कर कह रहे हैं, “प्रशासन सिर्फ आश्वासन देता है, कार्रवाई नहीं।” आम जनता का गुस्सा इस बात पर भी है कि गड्ढा लंबे समय से खुला था, कोई सिक्योरिटी गार्ड नहीं, घास-दलदल भरा पानी… युवाओं की पार्टी स्पॉट बन गया।
पुलिस और अथॉरिटी का रुख
पुलिस ने तीनों दोस्तों को हिरासत में लिया है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने का जिक्र है, लेकिन शराब और चोटों की जांच चल रही है। एनडीआरएफ और फायर सर्विस ने घंटे भर की मशक्कत के बाद शव निकाला। अमिती यूनिवर्सिटी ने शोक व्यक्त किया और पुलिस को पूरा सहयोग देने की बात कही। नोएडा अथॉरिटी ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने का आश्वासन दिया, लेकिन जनता पूछ रही है – “पहले क्यों नहीं किया?”
अंतिम विदाई
शव गाजियाबाद लाया गया। अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं। परिवार न्याय की लड़ाई लड़ रहा है, जबकि पूरा नोएडा इस ‘डेथ पिट’ पर सवाल उठा रहा है। क्या इस बार नोएडा अथॉरिटी और पुलिस सख्त कार्रवाई करेंगी या फिर शिकायतें दब जाएंगी? जनता नजर रखे हुए है।

