राज्यों के चुनावों में रिकॉर्ड मतदान: देश के पांच राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनावों का सिलसिला शुरू हो गया है। कल 9 अप्रैल को असम, केरल और पुडुचेरी में एक साथ मतदान हुआ, जहां जनता ने भारी उत्साह दिखाया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया। असम में 85.5% (1951 के बाद सबसे ज्यादा), केरल में करीब 78% और पुडुचेरी में 89% से ज्यादा वोटिंग हुई। बारिश के बावजूद लोग लंबी कतारों में लगे रहे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इसे लोकतंत्र की मजबूती बताया।
जनता की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही। असम में महिलाओं और युवाओं ने खासा जोर दिखाया। केरल में भी 2021 से ज्यादा टर्नआउट रहा। पुडुचेरी सबसे आगे रहा। लोग कह रहे हैं कि “इस बार बदलाव चाहिए” या “विकास और सुरक्षा पर वोट”। कुल 296 सीटों पर वोटिंग हुई। नतीजे 4 मई को आएंगे।
बंगाल चुनाव को लेकर क्या कह रही जनता?
पश्चिम बंगाल के चुनाव 23 से 29 अप्रैल तक दो चरणों में होने हैं (294 सीटें)। अभी मतदान बाकी है, लेकिन ओपिनियन पोल में टीएमसी और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर दिख रही है। कुछ सर्वे में टीएमसी को 141-158 सीटें, भाजपा को 115-138 मिल रही हैं। ममता बनर्जी अभी भी सबसे पसंदीदा सीएम चॉइस हैं, लेकिन बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे हावी हैं।
जनता में खासा उत्साह तो है, लेकिन ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) को लेकर गुस्सा भी। चुनाव आयोग ने अक्टूबर 2025 से अब तक करीब 91 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए। लाखों लोग चिंतित हैं कि उनका वोट कट जाएगा। टीएमसी इसे “साजिश” बता रही है, जबकि भाजपा इसे “फर्जी वोटर” हटाने का कदम मानती है। ग्रामीण इलाकों और सीमा क्षेत्रों में यह मुद्दा गरम है।
नेताओं के वादों पर क्या हो रहा है?
चुनावी माहौल में सभी पार्टियां वादों का पिटारा खोल रही हैं:
भाजपा: अमित शाह ने कल घोषणा-पत्र जारी किया। पीएम मोदी ने हल्दिया रैली में छह गारंटी दीं – भयमुक्त बंगाल, भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई, सरकारी कर्मचारियों को 7वां वेतन आयोग, महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं के लिए नौकरियां और घुसपैठ रोकना। डीए बकाया 45 दिनों में क्लियर करने और महिलाओं-युवाओं को मासिक सहायता का वादा।
कांग्रेस: मल्लिकार्जुन खड़गे ने मेनिफेस्टो में मुफ्त शिक्षा, महिलाओं को 2000 रुपये मासिक, किसानों को 15,000 रुपये सालाना और हर परिवार को 10 लाख का स्वास्थ्य कवर का वादा किया।
टीएमसी: ममता बनर्जी विकास और कल्याण योजनाओं पर जोर दे रही हैं।
जनता इन वादों पर नजर रखे हुए है। सोशल मीडिया और सड़क पर चर्चा है कि “वादे तो हर बार होते हैं, लेकिन नतीजा क्या?” बेरोजगारी अभी भी नंबर-1 मुद्दा है। कुल मिलाकर, हाल के चुनावों में जनता ने मतदान से लोकतंत्र को मजबूत किया। बंगाल में अब 23 अप्रैल से मतदान शुरू होगा। नजरें SIR विवाद, वादों और अंतिम चरण की रैलियों पर टिकी हैं। नतीजे 4 मई को आएंगे – देखना होगा कि जनता किसके वादों पर भरोसा जताती है।

