बारामती उपचुनाव: महाराष्ट्र की सबसे चर्चित सियासी धरती बारामती एक बार फिर गरमा गई है। दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी उतारकर महाविकास अघाड़ी (MVA) में ही दरार की आशंका पैदा कर दी है।
अजित पवार के निधन से खाली हुई सीट
बारामती विधानसभा सीट अजित पवार के निधन के बाद रिक्त हुई। वे इस सीट से आठ बार विधायक रहे थे। 2019 में उन्होंने 1.65 लाख वोटों के भारी अंतर से और 2024 में 1 लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज की थी। 23 अप्रैल 2026 को मतदान और 4 मई को मतगणना होनी है।
सुनेत्रा पवार मैदान में, कांग्रेस ने किया ऐलान
NCP की मौजूदा अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, जो अभी राज्यसभा सदस्य हैं, भाजपा के साथ गठबंधन में यह चुनाव लड़ेंगी। यह उनका पहला विधानसभा चुनाव होगा। कांग्रेस ने महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव आकाश विजयराव मोरे को उनके विरुद्ध उम्मीदवार घोषित किया है। आकाश मोरे, पूर्व MLC विजयराव मोरे के पुत्र हैं और धनगर समुदाय से आते हैं।
MVA में फूट के संकेत
शरद पवार की NCP(SP) ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि वे सुनेत्रा पवार के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेंगे अजित पवार के प्रति सम्मान स्वरूप। शिवसेना (UBT) ने भी निर्विरोध चुनाव के संकेत दिए थे। लेकिन कांग्रेस ने प्रत्याशी उतारकर MVA की एकता पर सवाल खड़े कर दिए।
संजय राउत का बड़ा बयान
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा “MVA में कोई भ्रम या अव्यवस्था नहीं है। बारामती सीट पर पहले शरद पवार लड़े थे, इसलिए यह उनकी पार्टी की सीट है।” उन्होंने यह भी जोड़ा “अगर कांग्रेस अलग फैसला ले रही है तो हम MVA के तौर पर उसमें दखल नहीं देंगे। लेकिन उद्धव जी और अजित पवार का भावनात्मक रिश्ता था।” राउत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी दल पर निर्विरोध चुनाव का दबाव नहीं डाला जा सकता और MVA की तीनों पार्टियाँ मिलकर फैसला लेंगी।
उद्धव ठाकरे से सुनेत्रा की बातचीत
सुनेत्रा पवार ने उद्धव ठाकरे से फोन पर बातचीत कर बारामती उपचुनाव में समर्थन माँगा। सूत्रों के अनुसार ठाकरे, पवार परिवार से पुराने भावनात्मक रिश्तों के चलते उनका समर्थन करने के इच्छुक हो सकते हैं, और कांग्रेस से भी इस विषय पर बात कर सकते हैं।
CM फडणवीस की अपील
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निर्विरोध चुनाव का समर्थन करते हुए इसे महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा और शिष्टाचार के अनुरूप बताया और सभी दलों से सुनेत्रा पवार के पीछे एकजुट होने की अपील की।
राजनीतिक समीकरण साफ
बारामती का यह उपचुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि पवार परिवार की भावनात्मक विरासत, MVA की एकजुटता और महायुति की मजबूती की असली परीक्षा है। 23 अप्रैल को जनता का फैसला तय करेगा कि बारामती की धरती अपने “पवार” को कैसे याद करती है।

