भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: ईरान को 48 घंटे के अल्टीमेटम से निवेशकों में हड़कंप

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान को दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम की आंच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार तक पहुंच गई। शुरुआती कारोबार में भारी बिकवाली के चलते बीएसई सेंसेक्स 1,555.62 अंक यानी 2 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,977.34 पर आ गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 479.95 अंक टूटकर 22,634.55 के स्तर पर पहुंच गया।

रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर

शेयर बाजार की गिरावट के साथ-साथ भारतीय मुद्रा पर भी भारी दबाव देखा गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 41 पैसे की गिरावट के साथ अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 93.94 पर जा पहुंचा। युद्ध से पहले डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू 91 के आसपास थी, जो अब 93 का स्तर पार कर चुकी है और कई विशेषज्ञों ने रुपये के 95 तक टूटने का अनुमान भी जाहिर किया है।

कौन से शेयर सबसे ज्यादा पिटे?

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से टाटा स्टील, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बजाज फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाइटन और अदानी पोर्ट्स सबसे ज्यादा नुकसान में रहीं। एकमात्र एचसीएल टेक ही हरे निशान में बंद हुई। यह गिरावट कई बड़ी ब्लू-चिप कंपनियों तक भी पहुंची है — UltraTech Cement, Maruti Suzuki, Eicher Motors और Bajaj Finance के शेयरों में 14 से 16 प्रतिशत तक की गिरावट मार्च महीने में दर्ज की जा चुकी है।

ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम बना सबसे बड़ा ट्रिगर

बैंकिंग और मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा के मुताबिक, बाजार में घबराहट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान को दिया गया 48 घंटे का अल्टीमेटम है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की मांग की गई है जो फिलहाल युद्ध से पहले की क्षमता के महज 5% पर चल रहा है। ऐसा न करने पर ईरान के पावर ग्रिड को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव तथा युद्ध की आशंका ने निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया है, जिससे वे अपना पैसा सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर रहे हैं।

एशियाई बाजारों में भी कोहराम

भारतीय बाजार अकेला नहीं पिटा। जापान का निक्केई 2.22 फीसदी टूटा, हांगकांग के हैंग सेंग में भी भारी गिरावट आई, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी और चीन का एसएसई कम्पोजिट दोनों लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। क्रूड की ऊंची कीमतों ने वैश्विक बाजारों पर दबाव बढ़ा दिया है।

विदेशी निवेशकों की जोरदार निकासी

मार्च महीने में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजारों से 88,180 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। इससे 2026 में अब तक एफपीआई निकासी का कुल आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये के पार हो गया है।

निवेशकों के ₹37 लाख करोड़ स्वाहा

पश्चिम एशिया संकट के बाद निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग ₹37 लाख करोड़ की गिरावट आई है और 1 जनवरी से 16 मार्च के बीच सेंसेक्स 11.4% गिर चुका है, जो पिछले 47 वर्षों में पांचवीं सबसे कमजोर शुरुआत है।

शेयर, बॉन्ड और सोना — सब एक साथ धड़ाम

इस बार बाजार का व्यवहार असामान्य रहा है। आमतौर पर संकट के समय निवेशक इक्विटी बेचकर सुरक्षित निवेश जैसे सोना और बॉन्ड की तरफ भागते हैं, लेकिन इस बार शेयर, बॉन्ड और सोना — तीनों एक साथ गिर रहे हैं। सोमवार को सोना 4% तक गिर गया और अमेरिका की दो-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 3.599% पर पहुंच गई।

क्रूड 100 डॉलर के पार, महंगाई की चिंता

कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने से बाजार में जोखिम से बचाव की प्रवृत्ति में इजाफा हुआ है। एविएशन, लॉजिस्टिक्स और पेंट जैसे तेल पर निर्भर उद्योगों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है, जबकि रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में तेजी देखी जा रही है।

विशेषज्ञों की सलाह: घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क रहें

जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों का मानना है कि डॉलर की यह तेजी लंबे समय तक नहीं टिक सकती और जब तक मध्य पूर्व में तनाव के बादल नहीं छंटते, शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव जारी रहने की पूरी आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी तत्व मजबूत हैं।

 

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