BJP का मास्टरस्ट्रोक: बीजेपी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपनी पहली उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, जिसमें 144 सीटों पर नाम घोषित किए गए हैं। इस सूची में सबसे बड़ा राजनीतिक दांव यह है कि बीजेपी ने विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी की पारंपरिक सीट भवनपुर (Bhabanipur) से उतारा है। सुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम से भी उम्मीदवार बनाया गया है, जहां उन्होंने 2021 में ममता बनर्जी को हराया था।
यह कदम बीजेपी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य ममता बनर्जी को उनकी अपनी सीट भवनपुर में बांधकर रखना है। भवनपुर कोलकाता का एक महत्वपूर्ण इलाका है, जहां ममता बनर्जी 2021 के उपचुनाव में भारी मतों से जीती थीं। बीजेपी का मानना है कि सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ सीधा मुकाबला ममता को राज्यव्यापी प्रचार से रोक सकता है और उन्हें रक्षात्मक मुद्रा में ला सकता है। सुवेंदु अधिकारी ने पहले ही दावा किया है कि वे ममता को भवनपुर में भी हराकर उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री बना देंगे।
भवनपुर की रणनीतिक अहमियत
भवनपुर को “मिनी भारत” कहा जाता है, क्योंकि यहां लगभग 40% मतदाता गैर-बंगाली समुदायों (गुजराती, मारवाड़ी, पंजाबी, ओडिया) से हैं। मुस्लिम मतदाता करीब 20% हैं।ऐतिहासिक रूप से यह टीएमसी का गढ़ रहा है, लेकिन बीजेपी गैर-बंगाली व्यापारी समुदायों में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हाल ही में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू (SIR) में भवनपुर से 47,000 नाम हटाए गए और 14,000 पर जांच बाकी है, जिसे टीएमसी ने बीजेपी-चुनाव आयोग की साजिश बताया है।
नंदीग्राम में क्या स्थिति?
सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम से दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं। टीएमसी ने अभी इस सीट पर उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पिछले कुछ महीनों से नंदीग्राम में सक्रिय हैं, जहां उन्होंने स्वास्थ्य शिविर और अन्य कार्यक्रम चलाए हैं। हालांकि, अभिषेक ने दिसंबर 2025 में स्पष्ट किया था कि वे नंदीग्राम से चुनाव नहीं लड़ेंगे और यह “निर्मित विवाद” है। टीएमसी सूत्रों के अनुसार, नंदीग्राम में कोई “सरप्राइज उम्मीदवार” उतारा जा सकता है।
बीजेपी की रणनीति का मकसद
बीजेपी इस कदम से ममता बनर्जी पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। अगर ममता भवनपुर छोड़ती हैं, तो उन्हें “भागने वाली” के रूप में प्रचारित किया जा सकता है, जो टीएमसी के मनोबल पर असर डालेगा। वहीं, अगर वे लड़ती हैं, तो उनकी राज्यव्यापी यात्रा सीमित हो सकती है। 2021 में सुवेंदु ने नंदीग्राम में ममता को सिर्फ 1,956 वोटों से हराया था, जो बीजेपी के लिए बड़ा नैरेटिव बना। अब भवनपुर में करीबी मुकाबला भी बीजेपी के लिए फायदेमंद होगा। टीएमसी ने इस कदम का मजाक उड़ाते हुए कहा है कि सुवेंदु दोनों सीटों पर “कुचल” दिए जाएंगे। चुनाव अप्रैल 2026 में होने हैं, और अभी टीएमसी की उम्मीदवार सूची जारी नहीं हुई है। यह “चक्रव्यूह” कितना असरदार होगा, यह वोटिंग के दिन ही साफ होगा।

