Noida News: नोएडा और ग्रेटर नोएडा के किराया बाजार में इन दिनों एक बड़ी हलचल मची हुई है। इनकम टैक्स विभाग ने करीब 50 हजार ऐसे मकान मालिकों को अपने रडार पर ले लिया है जो किरायेदारों से नकद में किराया वसूलते हैं और इसकी जानकारी विभाग को नहीं देते। विभाग को आशंका है कि इन मालिकों ने मिलकर एक हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा की टैक्स चोरी की है। अप्रैल 2026 से एक विशेष अभियान शुरू होने वाला है जो जून तक चलेगा।
अप्रैल से शुरू होगा तीन महीने का विशेष अभियान, AI से होगी जांच, क्या है पूरा मामला?
नोएडा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का सबसे महंगा किराया बाजार बन चुका है। यहां 11 हजार से अधिक कंपनियों में काम करने वाले लगभग 8 लाख कर्मचारी हैं, जिनमें से आधे से ज्यादा किराए के मकानों में रहते हैं। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद बड़ी संख्या में मकान मालिक किरायेदारों से ऑनलाइन भुगतान लेने से साफ मना कर देते हैं। वे केवल नकद में किराया लेते हैं ताकि यह रकम आयकर विभाग की नजर में न आए और टैक्स से बचा जा सके।
किरायेदारों की शिकायत से खुला राज
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब परेशान किरायेदारों ने उत्तर प्रदेश के प्रधान आयकर आयुक्त से शिकायत की कि उनके मकान मालिक UPI या बैंक ट्रांसफर से किराया लेने को तैयार नहीं हैं। इन शिकायतों की जांच के बाद कानपुर के प्रधान आयकर आयुक्त ने नोएडा जांच शाखा को निर्देश दिए कि एक विशेष अभियान चलाकर ऐसे मालिकों की पहचान की जाए। जांच में सामने आया कि जिले में 50 हजार से भी अधिक मकान मालिकों ने किरायेदारों का डेटा विभाग को कभी नहीं सौंपा।
AI और बेनामी जांच इकाई करेगी पड़ताल
यह अभियान पूरी तरह तकनीक पर आधारित होगा। आयकर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बैंक ट्रांजेक्शन, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य डेटा का गहराई से विश्लेषण करेगा। जो मामले संदिग्ध पाए जाएंगे उन मकान मालिकों को नोटिस जारी किए जाएंगे। इसके अलावा बेनामी निषेध इकाई को भी इस अभियान में शामिल किया गया है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि छिपाई गई आय का पैसा कहां लगाया गया — कहीं बेनामी प्रॉपर्टी या अन्य संपत्ति तो नहीं खरीदी गई।
नोएडा में किराया कितना है?
नोएडा का किराया बाजार तेजी से बढ़ रहा है। जुलाई से सितंबर 2025 के बीच रेंटल ग्रोथ 10.8 प्रतिशत रही। सबसे महंगे इलाकों में सेक्टर 107 शामिल है जहां 2BHK का औसत किराया 31,400 रुपये और 3BHK का 69,900 रुपये तक पहुंच चुका है। सेक्टर 74, 75, 62 और 137 भी महंगे इलाकों की सूची में हैं। वहीं ग्रेटर नोएडा वेस्ट और सेक्टर 151 में किराया अपेक्षाकृत कम है।
क्या कहते हैं टैक्स विशेषज्ञ?
टैक्स एक्सपर्ट्स की मानें तो अब नकद लेन-देन को छिपाना पहले जैसा आसान नहीं रहा। AI और डिजिटल ट्रैकिंग के आने के बाद संदिग्ध ट्रांजेक्शन पकड़ में आने लगे हैं। अगर कोई मकान मालिक नोटिस मिलने के बाद भी सही जानकारी नहीं देता तो उस पर भारी जुर्माना, पेनल्टी और ब्याज लग सकता है। किरायेदारों को भी सलाह दी जा रही है कि वे हमेशा UPI या बैंक ट्रांसफर के जरिए किराया चुकाएं और रसीद लेना न भूलें।
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सरकार की बड़ी रणनीति का हिस्सा
नोएडा में यह अभियान केंद्र सरकार की टैक्स चोरी रोकने की व्यापक मुहिम का एक अहम हिस्सा है। हाल के महीनों में आयकर विभाग ने AI और डिजिटल ट्रैकिंग के दम पर देशभर में कई बड़े घोटालों का पर्दाफाश किया है। इस अभियान से जहां किरायेदारों को राहत मिलेगी, वहीं ईमानदारी से टैक्स चुकाने वाले मकान मालिकों को भी बढ़ावा मिलेगा।
आगे क्या होगा?
जून 2026 के बाद पूरी जांच रिपोर्ट सामने आएगी जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अभियान शुरू होने की खबर आते ही नोएडा के मकान मालिकों में हड़कंप मच गया है। आयकर विभाग ने साफ कर दिया है — अब नकद किराया लेना बहुत महंगा पड़ सकता है।

