From traffic cameras to phone networks: इजराइल ने कैसे ट्रैक किया खामेनेई को; हत्या पर सोनिया ने मोदी सरकार पर साधा निशाना, अमेरिका में ट्रंप के हमलों का 52% विरोध

From traffic cameras to phone networks: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली खामेनेई (86) की 28 फरवरी 2026 को तेहरान में अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों में हत्या कर दी गई। हमला खामेनेई के आवासीय कंपाउंड पर हुआ, जिसमें कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारी भी मारे गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इसकी पुष्टि की और इसे ‘evil person’ का अंत बताया, साथ ही ईरानियों से रेजीम चेंज की अपील की। ईरान ने 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है और जवाबी मिसाइल-ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। क्षेत्र में तनाव चरम पर है,
ईरान के प्रॉक्सी गुट हिजबुल्लाह समेत सक्रिय हो गए हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स की चौंकाने वाली रिपोर्ट
ब्रिटेन के फाइनेंशियल टाइम्स ने खुलासा किया कि इजराइल ने सालों पहले तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरों को हैक कर लिया था। फुटेज एन्क्रिप्टेड करके सीधे तेल अवीव और दक्षिण इजराइल के सर्वर पर भेजा जाता था। खामेनेई के बॉडीगार्ड्स की आदतें, मूवमेंट और रूटीन को महीनों तक मॉनिटर किया गया। इसके अलावा मोबाइल फोन नेटवर्क में घुसपैठ कर सुरक्षा बलों के संचार को डिसरप्ट किया गया, ताकि कोई अलर्ट न पहुंचे। रिपोर्ट में सीआईए द्वारा साझा की गई खुफिया जानकारी का भी जिक्र है। इसी सटीक ट्रैकिंग के आधार पर हमला इतना सटीक साबित हुआ।

सोनिया गांधी का सरकार पर तीखा हमला
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी सरकार की खामोशी को ‘abdication of responsibility’ करार दिया। उन्होंने कहा, “यह निष्पक्षता नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के टूटने पर चुप्पी साधी जा रही है। भारत की विदेश नीति की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।” सोनिया ने मांग की कि बजट सत्र के दूसरे चरण में संसद में इस मुद्दे पर खुली बहस हो। सरकार ने अब तक केवल ‘संयम और डी-एस्केलेशन’ की अपील की है, लेकिन खामेनेई हत्या की निंदा नहीं की।

अमेरिका में ट्रंप के हमलों पर जनता का रुख
वॉशिंगटन पोस्ट के इंटरैक्टिव पोल के मुताबिक अमेरिकियों में ट्रंप प्रशासन के ईरान हमलों का विरोध ज्यादा है—52% लोगों ने इसे गलत बताया, जबकि केवल 39% ने समर्थन किया। ज्यादातर जवाबदेहों का कहना था कि प्रशासन ने हमलों के उद्देश्य साफ नहीं बताए। अन्य सर्वे भी इसी रुझान को दिखा रहे हैं।

ताजा अपडेट 
ईरान की अस्थायी तीन सदस्यीय परिषद अब देश चला रही है और उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। तेहरान में कुछ जगहों पर जश्न भी मनाया जा रहा है, लेकिन आम लोगों में डर का माहौल है। ईरान के जवाबी हमलों से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ गई है। भारत सरकार ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना न सिर्फ मध्य पूर्व को बदल सकती है, बल्कि वैश्विक कूटनीति और भारत की विदेश नीति पर भी गहरा असर डालेगी। आगे की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

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