नोएडा, 28 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस ने साइबर अपराध और धोखाधड़ी के विरुद्ध एक बड़ी सफलता हासिल की है। थाना सेक्टर-126 की पुलिस टीम ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो भोले-भले लोगों को विदेशों में आकर्षक नौकरी का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है। पुलिस ने जाल बिछाकर दो शातिर अभियुक्तों को सुपरनोवा बिल्डिंग के पास से गिरफ्तार किया है।
शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई
मामले का खुलासा तब हुआ जब तमिलनाडु के त्रिचुरापल्ली निवासी श्री तिरूमूर्ति (पुत्र मुत्रमिन सेल्वन) ने नोएडा पुलिस से संपर्क किया। पीड़ित ने बताया कि अज्ञात जालसाजों ने उसे फर्जी विदेशी नौकरी का विज्ञापन दिखाकर लगभग ₹1,50,000 ठग लिए थे। अभियुक्तों ने उससे और अधिक पैसों की मांग की थी और उसे रकम लेकर सेक्टर-94 स्थित सुपरनोवा बिल्डिंग के पास बुलाया था।
पुलिस का ‘ट्रैप’ और गिरफ्तारी
सूचना मिलते ही थाना सेक्टर-126 की पुलिस टीम ने तत्काल सक्रियता दिखाई और घेराबंदी की। योजना के अनुसार, शिकायतकर्ता ने अभियुक्तों को व्हाट्सएप कॉल कर बुलाया। अभियुक्तों ने सफेद रंग की टाटा नेक्सन कार से आने की बात कही। करीब 20 मिनट बाद जैसे ही कार पहुंची, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए DMI टी-प्वाइंट पर वाहन को रोक लिया।
रात करीब 23:37 बजे पुलिस ने कार सवार दो अभियुक्तों को दबोच लिया, जिनकी पहचान इस प्रकार हुई है:
- नियाज अहमद उर्फ अरमान: निवासी महाराजगंज, हाल पता- बाटला हाउस, दिल्ली (उम्र 43 वर्ष)।
- राजू शाह: निवासी सीवान, बिहार, हाल पता- IMT मानेसर, गुरुग्राम।
बरामदगी का विवरण
अभियुक्तों के कब्जे से पुलिस ने भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और नकदी बरामद की है:
- 09 भारतीय पासपोर्ट
- 04 मोबाइल फोन और 01 लैपटॉप
- 67 फर्जी जॉब पम्पलेट (FUTURE LIGHT MANPOWER के नाम से)
- 07 फर्जी एयरलाइन टिकट और 09 फर्जी वीज़ा प्रिंटआउट
- ₹73,500 नगद और अपराध में प्रयुक्त टाटा नेक्सन कार।
ठगी का हाई-टेक तरीका: कैसे फंसाते थे जाल में?
पुलिस पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था। इनकी कार्यप्रणाली के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:
- फर्जी विज्ञापन: ये लैपटॉप के जरिए नामी विदेशी कंपनियों के फर्जी विज्ञापन तैयार करते थे, जिनमें फ्री वीज़ा, फ्री टिकट और भारी सैलरी का लालच दिया जाता था।
- सोशल मीडिया का इस्तेमाल: अभियुक्त फेसबुक, टेलीग्राम और व्हाट्सएप के उन ग्रुप्स में शामिल हो जाते थे जहाँ नौकरी की तलाश करने वाले लोग सक्रिय रहते हैं। वहां अपनी फर्जी कंपनी ‘Future Light Manpower’ के पम्पलेट पोस्ट करते थे।
- व्हाट्सएप कॉलिंग: पकड़े जाने के डर से ये केवल व्हाट्सएप कॉल का इस्तेमाल करते थे ताकि लोकेशन ट्रेस न हो सके।
- विश्वास जीतना: पीड़ितों को फर्जी ऑफर लेटर और एयरलाइन टिकट भेजकर विश्वास में लिया जाता था।
- पासपोर्ट जब्त करना: वीज़ा प्रोसेसिंग के नाम पर ये पीड़ितों के असली पासपोर्ट अपने पास रख लेते थे ताकि पीड़ित भाग न सके और दबाव में आकर पैसे देता रहे।
70 लाख से अधिक की ठगी
प्रारंभिक जांच और मोबाइल फोन के परीक्षण से पता चला है कि यह गिरोह अब तक 100 से अधिक लोगों को अपना शिकार बना चुका है। अभियुक्तों ने अब तक विभिन्न राज्यों के लोगों से लगभग ₹70 लाख से अधिक की अवैध कमाई की है।
कानूनी कार्यवाही
नोएडा पुलिस ने अभियुक्तों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 363(3), 340(2), 61(2) और IT एक्ट की धारा 66D के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और उनके बैंक खातों की जांच कर रही है।
सावधानी की अपील: नोएडा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले अनधिकृत नौकरी के विज्ञापनों से सावधान रहें और किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना मूल पासपोर्ट या धन राशि न सौंपें।

