शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने दक्षिण प्लाजा पर शाम 4 बजे (बीडीटी) आयोजित किया। कैबिनेट में 25 मंत्री और 24 राज्य मंत्री शामिल हैं, कुल लगभग 50 सदस्य। कुछ प्रमुख पोर्टफोलियो इस प्रकार हैं:
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर: स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता
सलाहुद्दीन अहमद: गृह मंत्रालय
अमीर खसरो महमूद चौधरी: वित्त और योजना
इकबाल हसन महमूद टुकु: बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन
खलीलुर रहमान: विदेश मंत्रालय (यूनुस सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके)
अन्य: मुक्ति युद्ध मामलों, महिलाओं और बच्चों, पर्यावरण, भूमि, संस्कृति, श्रम, वाणिज्य आदि मंत्रालय।
कैबिनेट में अल्पसंख्यक समुदायों से दो प्रतिनिधि शामिल हैं—एक हिंदू (निताई रॉय चौधरी) और एक बौद्ध (दीपेन देवान)।
विपक्ष का बॉयकॉट और सुधार विवाद शपथ ग्रहण में जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) ने हिस्सा नहीं लिया। दोनों ने बीएनपी पर आरोप लगाया कि उसके सांसदों ने जुलाई चार्टर (2024 के छात्र आंदोलन के बाद बने सुधार दस्तावेज) के तहत संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में दूसरी शपथ नहीं ली। जुलाई चार्टर में संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं में बड़े सुधार की मांग है, जिसे फरवरी चुनाव के साथ जनमत संग्रह में मंजूरी मिली थी। जमात नेता शफीकुल इस्लाम मसूद ने कहा कि बीएनपी के इनकार के विरोध में वे कैबिनेट शपथ समारोह का बहिष्कार कर रहे हैं। एनसीपी ने भी फेसबुक पर घोषणा की कि वे हिस्सा नहीं लेंगे। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अगर सुधार नहीं हुए तो सड़क पर विरोध-प्रदर्शन हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति समारोह में भारत की ओर से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने हिस्सा लिया। वे स्पेशल इंडियन एयर फोर्स फ्लाइट से ढाका पहुंचे। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू भी मौजूद रहे। भूटान पीएम ने अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस से भी मुलाकात की और चुनाव की निष्पक्षता की सराहना की।
तारीक रहमान का सफर और चुनौतियां
तारीक रहमान (60) पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और राष्ट्रपति जियाउर रहमान के पुत्र हैं। 2009 से लंदन में निर्वासन में थे। बीएनपी ने 2001-2006 के बाद 20 साल बाद सत्ता संभाली। अब उन्हें आर्थिक स्थिरता, गारमेंट सेक्टर की रिकवरी, राजनीतिक स्थिरता और जुलाई चार्टर के सुधार जैसे बड़े चुनौतियों का सामना करना है। 2024 के छात्र आंदोलन में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद देश अस्थिरता से गुजरा है।
यह बीएनपी के लिए ऐतिहासिक जीत है, लेकिन गठबंधन में दरार और सुधार विवाद से शुरुआत में ही टेंशन दिख रही है। बांग्लादेश अब एक नई राजनीतिक यात्रा पर है।

