Devotion to Bajrangbali or politics of hate?: उत्तराखंड की कोटद्वार घटना ने फिर छेड़ी ‘बजरंग दल vs बजरंगबली’ की बहस

Devotion to Bajrangbali or politics of hate?: उत्तराखंड के कोटद्वार में एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम पर शुरू हुआ विवाद अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही चर्चाएं बजरंग दल के कार्यों और बजरंगबली की सच्ची भक्ति के बीच के अंतर पर केंद्रित हैं। कई लोग कह रहे हैं कि हनुमान जी प्रेम, विनय और असहायों की रक्षा के प्रतीक हैं, जबकि कुछ संगठनों के कार्य नफरत और हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं।

कोटद्वार विवाद की शुरुआत
26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के दिन बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कोटद्वार में 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार मोहम्मद शोएब की ‘बाबा ड्रेस’ नामकी दुकान पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि मुस्लिम होने के बावजूद ‘बाबा’ शब्द का इस्तेमाल भ्रम पैदा कर रहा है। इस दौरान स्थानीय जिम ट्रेनर दीपक कुमार ने दुकानदार का बचाव किया और खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताते हुए कहा, “मैं न हिंदू हूं, न मुस्लिम – मैं इंसान हूं। इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।”

दीपक का यह वीडियो वायरल हो गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उनका समर्थन किया, जबकि दीपक को धमकियां मिलने लगीं। उनका जिम बंद करना पड़ा और बेटी स्कूल नहीं जा पा रही। पुलिस ने तीन अलग-अलग FIR दर्ज कीं – एक बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर, एक दुकानदार पर और एक दीपक पर भी।

सोशल मीडिया पर ‘बजरंगबली बनाम बजरंग दल’ की चर्चा
इस घटना ने पुरानी बहस को फिर हवा दे दी है। कई वीडियो और पोस्ट में तुलसीदास की पंक्तियों (“निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करे सनमान”) का हवाला देकर कहा जा रहा है कि बजरंगबली की भक्ति की पहली शर्त प्रेम और विनम्रता है, न कि नफरत या कानून हाथ में लेना। बजरंग दल, जो 1984 में विश्व हिंदू परिषद द्वारा राम जन्मभूमि आंदोलन की सुरक्षा के लिए गठित हुआ था, के कुछ कार्यों को हनुमान जी की शिक्षाओं से अलग बताया जा रहा है।

चर्चा में ‘अली और बजरंगबली’ की साझा एकता का भी जिक्र हो रहा है। लोग कह रहे हैं कि दोनों का संदेश प्रेम और मानवता की सेवा है। छल-कपट या पहचान छुपाने की निंदा करते हुए राम के वचन (“निर्मल मन जन सो मोहि पावा”) उद्धृत किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक इस्तेमाल समाज में कटुता पैदा करता है, जबकि संविधान कानून की सर्वोच्चता सुनिश्चित करता है।

बजरंग दल का पक्ष है कि वे सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन आलोचक इसे नफरत की राजनीति बता रहे हैं। पुलिस ने क्षेत्र में तनाव को देखते हुए बैरिकेडिंग की है और मीडिया को भी रोका जा रहा है।

यह घटना समाज को याद दिला रही है कि सच्ची भक्ति रूहानी सुकून और दूसरों की सेवा में है, न कि अशांति फैलाने में। प्रेम ही वह रास्ता है जो ईश्वर तक पहुंचाता है।

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