The Baloch women’s scourge: क्यों बलूच महिलाएं हथियार उठा रही हैं, पाक फौजों पर मौत बरसा रही

The Baloch women’s scourge: पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत में चल रहे विद्रोह ने एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने हालिया समन्वित हमलों में दो महिला फिदायीन हमलावरों की तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें 24 वर्षीय आसिफा मेंगल भी शामिल हैं। ये हमले 29-31 जनवरी 2026 के बीच हुए, जिसमें दर्जनों नागरिक और सुरक्षाबल मारे गए। पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई में 145 से ज्यादा BLA लड़ाकों को मार गिराने का दावा किया है। लेकिन सवाल यह है कि बलूच महिलाएं अब हथियार क्यों उठा रही हैं और आत्मघाती हमलावर तक बन रही हैं?

BLA ने जारी की गई तस्वीरों में आसिफा मेंगल को मजेद ब्रिगेड की फिदायीन सदस्य दिखाया गया है। एक अन्य महिला हमलावर की पहचान द्रोशुम या हवा बलोच बताई जा रही है। BLA के अनुसार, आसिफा ने नुशकी में ISI मुख्यालय पर हमला किया। ये हमले BLA की ‘ऑपरेशन हेरॉफ फेज-2’ का हिस्सा थे, जिसमें 12 जगहों पर एक साथ हमले हुए।

शांतिपूर्ण विरोध विफल, अब हथियारों का रास्ता
विशेषज्ञों का कहना है कि बलूच महिलाओं का सशस्त्र संघर्ष में शामिल होना पाकिस्तानी सेना की दमनकारी नीतियों का नतीजा है। जब पुरुषों को जबरन गायब कर दिया जाता है या जेल में डाल दिया जाता है, तो महिलाएं आगे आ रही हैं। वॉयस फॉर बलोच मिसिंग पर्सन्स के अनुसार, 2000 से अब तक 5,000 से ज्यादा लोग लापता हो चुके हैं, ज्यादातर पुरुष।

पाकिस्तानी राजनीतिक वैज्ञानिक आयशा सिद्दीका कहती हैं, “जब निराशा हताशा में बदल जाती है, तो महिलाएं हिंसा में सक्रिय हो जाती हैं। परिवार दर परिवार पीड़ित होते हैं, न्याय नहीं मिलता, तो दुख क्रोध में बदल जाता है।”

यह ट्रेंड नया नहीं है। 2022 में शारी बलोच ने कराची यूनिवर्सिटी में चीनी नागरिकों पर आत्मघाती हमला किया था। उसके बाद सुमैया कलंद्रानी और बनुक महिकान जैसी महिलाएं BLA की मजेद ब्रिगेड में शामिल हुईं। बलोच आंदोलन अब कबीले प्रमुखों से आगे बढ़कर शिक्षित मध्यम वर्ग की महिलाओं तक पहुंच गया है।

पाकिस्तानी सेना की मुश्किलें बढ़ीं
स्ट्रैटेजिक एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी कहते हैं कि महिला फिदायीन हमलावरों का इस्तेमाल BLA की रणनीति है, क्योंकि इन्हें पकड़ना मुश्किल होता है। इससे पाकिस्तानी सेना को ज्यादा नुकसान पहुंच रहा है। 2025 में बलोच विद्रोह से जुड़ी मौतें 74% बढ़ीं।

हालांकि पाकिस्तानी अधिकारी इसे BLA का शोषण बताते हैं, जो युवा शिक्षित महिलाओं को भावनात्मक दबाव या प्रोपगैंडा से भर्ती करता है।

बलोचिस्तान में शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाली महिलाएं जैसे महरंग बलोच जेल में हैं, जबकि सशस्त्र संघर्ष करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। BLA का दावा है कि वे अपनी ‘मातृभूमि’ की आजादी तक लड़ते रहेंगे। पाकिस्तानी सेना ने जवाबी ऑपरेशन तेज कर दिए हैं, लेकिन विद्रोह थमने का नाम नहीं ले रहा।

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