नोएडा पुलिस ने किया महाठगों का खुलासाः लैप्स बीमा पॉलिसी के रुपये वापस दिलाने का देते थे झांसा

नोएडा । यूपी नोएडा के थाना फेज-1 पुलिस ने महाठगों के गिरोह का खुलासा किया है। ये ठग लोगों को फोन कॉल कर लैप्स बीमा पॉलिसी के रुपये वापस दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का वीरवार को पर्दाफाश कर सरगना समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी हजारों लोगों से रकम ऐंठ चुके हैं। उनके पास से एक लैपटॉप, 16 मोबाइल फोन, तीन पीएनटी फोन, 15 कॉलिंग डाटा शीट बरामद हुईं।

डीसीपी यमुना प्रसाद का बयान
डीसीपी यमुना प्रसाद ने बताया कि पिछले दिनों सूचना मिली कि सेक्टर-10 में कुछ लोगों ने मिलकर कॉल सेंटर के नाम पर कार्यालय खोला है। कार्यालय में कुछ लोगों को नौकरी पर रखा है। उनके द्वारा लोगों को कॉल कराई जाती है। लोगों को लैप्स बीमा पॉलिसी के रुपये वापस दिलाने का झांसा देकर आरोपी ठगी करते हैं। सूचना को पुख्ता कर एसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में फेज-1 थाना प्रभारी निरीक्षक अमित कुमार मान ने टीम गठित की। वीरवार को टीम ने छापेमारी की। मौके पर देखा तो कई कर्मचारी लोग कॉल कर रहे थे। हालांकि, कर्मचारियों को ठगी के बारे में जानकारी नहीं थी। जांच में पता चला कि इस फर्जी कॉल सेंटर का संचालन जिला बदायूं के सहसवान निवासी वरुण शर्मा, जिला मैनपुरी के कस्बा कुरावली निवासी मदन गुप्ता और बिहार के जिला खगड़िया के मेघोना गांव निवासी प्रदीप वर्मा करते हैं। टीम ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। वरुण वर्तमान में बिसरख थाना क्षेत्र की सुपरटेक इको विलेज सोसाइटी में किराये पर रहता है, जबकि मदन टेक जोन चार स्थित ला रेजीडेंसी सोसाइटी में रहता है। प्रदीप वर्मा भंगेल गांव में किराये पर रहता है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और मौके से इलेक्ट्रिक उपकरण बरामद कर लिए। पुलिस ने आरोपियों के 20 से अधिक बैंक खातों में एक करोड़ 20 लाख रुपये फ्रीज कराए।

ऐसे करते थे लोगों से ठगी
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि गिरोह का सरगना वरुण है। उसी ने अपने साथ मदन गुप्ता और प्रदीप वर्मा को शामिल कर लिया। वरुण ने ही जस्ट डायल कंपनी से 10 हजार रुपये में पांच हजार लोगों का डाटा लिया। यह डाटा कर्मचारियों को बांट दिया। वे लैप्स बीमा पॉलिसी के रुपये वापस दिलाने के नाम पर लोगों को कॉल करते थे। रुपये ठग कर फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कराते थे।

निवेश के नाम भी लोगों को फंसाया
आरोपी रियल स्टेट में निवेश करने और एलआईसी की पॉलिसी को कम समय में परिपक्व कराके पूरी रकम वापस कराने के नाम पर ठगी करते थे। लोगों से 10 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक का निवेश करा लेते थे। इस प्रकार की ठगी से संबंधित 20 से अधिक शिकायतें एनसीआरपी पर विभिन्न राज्यों में दर्ज हैं। आरोपी ठगी के रुपये से आॅनलाइन क्रिकेट सट्टा (बैटिंग) खेलते थे, जिसमें 20 प्रतिशत पर खाता खरीदकर 80 प्रतिशत रुपये अपने बैंक खातों में जमा करा लेते थे।

 

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