The mass killing of stray dogs in Telangana continues unabated: एक महीने में 1200-1500 की मौत, चुनावी वादों के नाम पर जहर; दिल्ली में ‘तेरहवीं’, पुलिस केस दर्ज

The mass killing of stray dogs in Telangana continues unabated: तेलंगाना में आवारा कुत्तों की सामूहिक हत्या का सिलसिला जारी है। दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 तक एक महीने में 1200 से 1500 तक कुत्तों को जहर देकर या इंजेक्शन से मारने की घटनाएं सामने आई हैं। कुछ रिपोर्ट्स में बंदरों की मौत भी बताई जा रही है। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि ग्राम पंचायत चुनावों में विजयी उम्मीदवारों द्वारा मतदाताओं से किए वादों को पूरा करने के लिए यह क्रूरता की जा रही है। कई जिलों में पुलिस ने सरपंच, सचिव और अन्य पर केस दर्ज किए हैं, लेकिन हत्याएं थम नहीं रही हैं।

हालिया घटनाएं:
• हनुमकोंडा जिले के पथीपाका गांव में 200 कुत्तों की हत्या।
• नागरकुरनूल में यचरम और थिम्माइपल्ली गांवों में 100-100 कुत्तों को जहर।
• जगतियाल में 300, कामारेड्डी में 200 और अन्य जिलों में सैकड़ों मामले। कार्यकर्ताओं के अनुसार, कुल मौतें 1500 के करीब पहुंच गई हैं। कई गांवों में कुत्तों को जहर का इंजेक्शन देकर या जहरीला चारा खिलाकर मारा जा रहा है और शवों को दफना दिया जा रहा है।

चुनावी वादों की क्रूर पूर्ति
ग्राम पंचायत चुनावों (नवंबर-दिसंबर 2025) में कई उम्मीदवारों ने आवारा कुत्तों और बंदरों को हटाने का वादा किया था। जीत के बाद कुछ सरपंच और प्रतिनिधि इसे पूरा करने के लिए हायर लोगों से हत्याएं करवा रहे हैं। कई मामलों में दिनदहाड़े यह क्रूरता हुई। पुलिस ने हनुमकोंडा, जगतियाल, नागरकुरनूल आदि में सरपंच, उनके पति, सचिव और हायर व्यक्तियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत केस दर्ज किए हैं।

कार्यकर्ताओं का विरोध और दिल्ली में ‘तेरहवीं’
पशु कल्याण कार्यकर्ता लगातार गांव-गांव जाकर शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। स्ट्रे एनीमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SAFI) के गौतम, प्रीति और विनय जैसे युवा जिलों में घूमकर दस्तावेजीकरण कर रहे हैं। 27 जनवरी को दिल्ली में कार्यकर्ताओं ने मारे गए कुत्तों की ‘तेरहवीं’ आयोजित की और न्याय की मांग की।

राज्य की मंत्री दानासरी अनसुया सीतक्का ने हत्याओं को ‘गैरकानूनी और अमानवीय’ बताया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। कार्यकर्ता कहते हैं कि नसबंदी, टीकाकरण और जागरूकता ही समाधान है, हत्या नहीं।

राष्ट्रीय बहस और सुप्रीम कोर्ट
देशभर में कुत्तों के काटने के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने नसबंदी और आश्रय की व्यवस्था पर जोर दिया है। तेलंगाना की घटनाएं पशु संरक्षण कानूनों की अनदेखी और चुनावी वादों की क्रूरता को उजागर कर रही हैं। जांच जारी है, लेकिन कार्यकर्ता हाईकोर्ट में PIL दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। मामले पर सभी की नजरें टिकी हैं कि हत्याएं कब रुकेंगी।

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