ताजा अपडेट के अनुसार, प्लॉट के मालिक रियल एस्टेट कंपनी एमजेड विजटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अभय कुमार को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। उन्हें बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस ने बिल्डर्स के खिलाफ पर्यावरण प्रदूषण कानूनों के तहत नई एफआईआर भी दर्ज की है, जिसमें पांच प्रमुख आरोपी नामजद हैं।
घटना के बाद व्यापक जनाक्रोश को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा एक्शन लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ डॉ. लोकेश एम को पद से हटा दिया गया। साथ ही, मामले की गहन जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की गई, जिसे पांच दिनों में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। SIT नोएडा अथॉरिटी, प्रशासन और पुलिस की भूमिका की भी जांच कर रही है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी के गंभीर आरोप लगे हैं। युवराज के पिता ने बताया कि दुर्घटना के बाद पुलिस नौ मिनट में पहुंच गई, लेकिन फायर ब्रिगेड और अन्य बचाव दल को पहुंचने में लंबा समय लगा। कार को गड्ढे से निकालने में चार दिन लग गए, जो 20 जनवरी को पूरा हुआ। सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों की जांच चल रही है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि एक गवाह पर दबाव बनाया जा रहा है की वो अपनी बात से मुकर जाये या गवाही ना दे। मोनिंदर सिंह ने कहा, इस मामले में एकमात्र चश्मदीद गवाह हूं और मैं सच के साथ खड़ा रहूंगा. मेरा परिवार और स्थानीय लोग मेरा समर्थन कर रहे हैं. उन्होंने आगे आरोप लगाया, पुलिसकर्मियों ने कहा कि ये मामला 2-3 दिन में मीडिया से शांत हो जाएगा. जबकि तुम यही रहते हो. जब तक मामला शांत नहीं होता 5-10 दिन के लिए गायब हो जाओ. मीडिया से दूरी बना लो.
यह प्लॉट नोएडा के विवादास्पद ‘स्पोर्ट्स सिटी’ प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसमें बड़े स्तर पर अनियमितताओं के आरोप हैं। 2021 में CAG रिपोर्ट में स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट में 9,000 करोड़ रुपये के नुकसान का खुलासा हुआ था। फरवरी 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे ‘बड़ा घोटाला’ करार देते हुए CBI जांच के आदेश दिए थे। मार्च 2025 में CBI ने लोटस ग्रीन और अन्य बिल्डर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, जिसमें भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप शामिल हैं। कोर्ट ने स्पोर्ट्स फैसिलिटी विकसित न करने और रिहायशी निर्माण पर फोकस करने के लिए अधिकारियों और बिल्डर्स की मिलीभगत का आरोप लगाया था।
2022 से इस प्लॉट पर सीवर और ड्रेनेज पानी जमा होने की शिकायतें लगातार आ रही थीं, जिसे बिल्डर ने नोएडा अथॉरिटी को पत्र लिखकर बताया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि सिस्टमिक फेल्योर और पुरानी अनियमितताओं का नतीजा है।
युवराज के परिवार और सोशल मीडिया पर लोग सड़क सुरक्षा, निर्माण साइटों की फेंसिंग और त्वरित रेस्क्यू सिस्टम की मांग कर रहे हैं। SIT और CBI की जांच से उम्मीद है कि जिम्मेदार व्यक्तियों के ऊपर सख्त कार्रवाई होगी। मामला अभी जांच के अधीन है और आगे अपडेट का इंतजार है।

