High-voltage drama in Tamil Nadu Assembly: तमिलनाडु विधानसभा के नए सत्र के पहले दिन मंगलवार सुबह बड़ा विवाद खड़ा हो गया। राज्यपाल आरएन रवि ने डीएमके सरकार द्वारा तैयार अभिभाषण पढ़ने से इनकार कर दिया और सदन से वॉकआउट कर गए। यह लगातार तीसरा साल है जब राज्यपाल ने उद्घाटन अभिभाषण नहीं पढ़ा।
राजभवन की ओर से जारी 13-पेज के बयान में कहा गया कि अभिभाषण में “कई असत्यापित दावे और भ्रामक बयान” हैं। निवेश के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है, जबकि वास्तविक निवेश बहुत कम है। महिलाओं की सुरक्षा, दलितों पर अत्याचार, शिक्षा की गिरती गुणवत्ता और कर्मचारियों की नाराजगी जैसे मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। राज्यपाल ने राष्ट्रगान का भी अपमान होने का आरोप लगाया और कहा कि उनका माइक बार-बार बंद किया गया, उन्हें बोलने नहीं दिया गया।


मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्यपाल के व्यवहार को “बचकाना और असंवैधानिक” बताया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का काम सरकार द्वारा तैयार अभिभाषण पढ़ना है, न कि अपनी राय थोपना। डीएमके प्रवक्ता ने इसे “अपमानजनक” करार दिया। स्टालिन ने घोषणा की कि उनकी पार्टी संविधान में संशोधन के लिए अन्य दलों के साथ मिलकर काम करेगी ताकि विधानसभा सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से करने की प्रथा खत्म हो।
सदन में हंगामा हुआ। सत्तापक्ष के सदस्यों ने नारे लगाए, जिसके बाद राज्यपाल बाहर चले गए। स्पीकर ने सदन की कार्यवाही जारी रखी और अभिभाषण को सदन के रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया। विपक्षी दल एआईएडीएमके और पीएमके ने राज्यपाल के रुख का समर्थन किया। पीएमके विधायक ने कहा कि राज्यपाल का कदम सही था क्योंकि सत्तापक्ष ने नारेबाजी की।
यह विवाद राज्यपाल और डीएमके सरकार के बीच लंबे तनाव का हिस्सा है। पिछले वर्षों में भी राष्ट्रगान और तमिल थाई वाझ्थु के क्रम को लेकर टकराव हो चुका है।

