पुलिस के अनुसार, बच्ची रिम्पा खातून की रिश्तेदार है और उसे बिना विभागीय अनुमति के CRPF कैंप स्थित सरकारी क्वार्टर में रखा गया था। बच्ची से घर के सारे काम कराए जाते थे और छोटी-छोटी बातों पर उसे बुरी तरह पीटा जाता था। 14-15 जनवरी की रात को मारपीट इतनी बेरहम थी कि बच्ची बेहोश हो गई। उसे पहले सरवोदय अस्पताल ले जाया गया, फिर मैक्स अस्पताल (सेक्टर-128) में भर्ती किया गया, जहां वह वेंटिलेटर पर है।
मेडिकल रिपोर्ट में बच्ची के शरीर पर गंभीर चोटें मिली हैं—टूटी हड्डियां, फटे नाखून, टूटे दांत, गहरे घाव और पूरे शरीर पर सूजन। उसका हीमोग्लोबिन स्तर खतरनाक रूप से कम (केवल 1.9) हो गया, जो गंभीर कुपोषण को दर्शा रहा है। पुलिस ने यह भी कहा कि बच्ची को लंबे समय तक भूखा रखा गया था।
घटना की शिकायत CRPF के सबेदार मेजर ने एकोटेक-3 थाने में दर्ज कराई, जिसके आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 110 (उपहति का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया। दोनों आरोपियों को रविवार (18 जनवरी) को गिरफ्तार कर लिया गया। CRPF ने कांस्टेबल तारिक अनवर को निलंबित कर दिया है और विभागीय जांच शुरू की है। विभाग ने कहा कि पुलिस जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। बच्ची को कैंप में रखने की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी।
एक सहायक कमांडेंट की शिकायत में यह भी जिक्र है कि क्वार्टर को जल्दबाजी में खाली कराया जा रहा था, जिससे सबूत मिटाने की आशंका की जा रही। बच्ची के इलाज में चाइल्ड वेलफेयर विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं।
यह मामला बाल श्रम, ट्रैफिकिंग और बच्चियों पर अत्याचार के कानूनों के तहत भी जांच के दायरे में आ सकता है। पुलिस और CRPF दोनों जांच कर रहे हैं। बच्ची की हालत पर senior अधिकारी नजर रखे हुए हैं।

