Impact of US tariffs: चीन ने 2025 में विश्व का सबसे बड़ा व्यापार अधिशेष हासिल कर नया रिकॉर्ड कायम किया है। देश का कुल व्यापार अधिशेष 1.19 ट्रिलियन डॉलर (करीब 1.189 ट्रिलियन) पहुंच गया, जो 2024 की तुलना में 20% अधिक है। चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर महीने में अकेले अधिशेष 114 अरब डॉलर रहा, जो साल के प्रमुख मासिक आंकड़ों में से एक है।

मुख्य आंकड़े: निर्यात 5.5% बढ़े, आयात लगभग स्थिर
• पूरे साल निर्यात में 5.5% की वृद्धि दर्ज की गई, जो कुल 3.77 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
• आयात में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई, जिससे अधिशेष और चौड़ा हुआ।
• दिसंबर में निर्यात 6.6% और आयात 5.7% बढ़ा, जो बाजार अनुमानों से बेहतर रहा।
• कुल व्यापार पहली बार 45 ट्रिलियन युआन (करीब 6.4 ट्रिलियन डॉलर) के पार पहुंचा।
अमेरिका को निर्यात 20% घटा, लेकिन नए बाजारों में उछाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के बावजूद चीन के कारखानों ने रणनीति बदली। अमेरिका को निर्यात 20% गिरा और अमेरिका का चीन के कुल निर्यात में हिस्सा घटकर ऐतिहासिक निचले स्तर 11% पर आ गया। लेकिन दक्षिण-पूर्व एशिया (आसियान), अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाकर चीन ने टैरिफ को बायपास कर दिया। कई सामान वियतनाम, मेक्सिको जैसे देशों के रास्ते अमेरिका पहुंच रहे है।
चीन की घरेलू नीति भी इसका बड़ा कारण है। बीजिंग की ‘आत्मनिर्भरता’ रणनीति के तहत आयात को घरेलू उत्पादन से बदला जा रहा है, जिससे आयात कमजोर रहा। अक्टूबर में जारी 2030 तक की पंचवर्षीय योजना में भी इस पर जोर दिया गया।
वैश्विक प्रभाव: दुनिया के बाजारों में चीनी सामान की बाढ़
यह रिकॉर्ड अधिशेष वैश्विक व्यापार असंतुलन को और गहरा कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी निर्यातों की ‘बाढ़’ से कई देशों की घरेलू इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ेगा। 2026 में ट्रंप प्रशासन के नए टैरिफ से तनाव और बढ़ सकता है, लेकिन चीन नए बाजारों और कमजोर युआन की मदद से मुकाबला करने को तैयार है।
यह आंकड़े चीन की निर्यात-निर्भर अर्थव्यवस्था की मजबूती दिखाते हैं, लेकिन वैश्विक व्यापार युद्ध के नए दौर की आहट भी दे रहे हैं।

