कोर्ट ने एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) और एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) से 48 घंटे के अंदर विस्तृत जवाब मांगा है। पूछा गया है कि घटनास्थल पर मौजूद टीमों ने क्या कदम उठाए, कमांडिंग ऑफिसर कौन थे, और बचाव टीमों को ऐसी आपात स्थितियों के लिए क्या ट्रेनिंग दी गई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि “डूबने से पहले पर्याप्त समय था, जिसमें बचाव का प्रयास किया जा सकता था।” अग्निशमन विभाग की ढिलाई पर भी DG Fire से जवाब तलब किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि: 27 वर्षीय युवराज मेहता 16-17 जनवरी 2026 की रात घने कोहरे में अपनी कार से घर लौट रहे थे, जब सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन प्लॉट (SC-02 ए-3) के बेसमेंट के लिए खोदे गए 20-30 फीट गहरे, पानी से भरे गड्ढे में कार गिर गई। गड्ढे पर कोई बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड या प्रकाश व्यवस्था नहीं थी। युवराज करीब 90 मिनट तक कार की छत पर चढ़कर फोन की फ्लैशलाइट जलाकर मदद मांगते रहे, पिता को फोन भी किया, लेकिन पुलिस, फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों के पहुंचने के बावजूद समय पर नहीं निकाला जा सका। उपकरणों की कमी और समन्वय की कमी के कारण मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम में डूबने की पुष्टि हुई।
याचिका और जांच: नोएडा के हिमांशु जायसवाल द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई हो रही है। कोर्ट पहले ही सभी एजेंसियों को नोटिस जारी कर चुका है। एसआईटी जांच चल रही है, लेकिन रिपोर्ट में देरी पर भी सवाल उठे हैं। दादरी विधायक तेजपाल नागर ने कहा कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो रही है और एसआईटी रिपोर्ट के बाद आगे एक्शन लिया जाएगा।
पिछली कार्रवाई: फरवरी में कोर्ट ने बिल्डर अभय कुमार (MZ Wiztown Planners) को प्रक्रियागत चूक के कारण तुरंत रिहा करने का आदेश दिया था। दो अन्य कर्मचारियों को भी बेल मिल चुकी है। यह मामला नोएडा-ग्रेटर नोएडा में निर्माण साइटों पर सुरक्षा मानकों की कमी, अनियंत्रित खुदाई और आपदा प्रबंधन की कमजोरियों को उजागर कर रहा है। कोर्ट की अगली सुनवाई जल्द होने की संभावना है, जहां एनडीआरएफ-एसडीआरएफ के जवाब पर फैसला होगा। स्थिति पर नजर बनी हुई है – क्या सख्त कार्रवाई होगी या फिर फाइलें ठंडे बस्ते में?

