“21वीं सदी का सबसे अहम फैसला महिला आरक्षण”: नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में पीएम मोदी, 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र

“21वीं सदी का सबसे अहम फैसला महिला आरक्षण”: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय स्तर के ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में सरकार, शिक्षा, विज्ञान, खेल, उद्यमिता, मीडिया, समाज सेवा और संस्कृति जैसे विविध क्षेत्रों की महिला हस्तियों ने भाग लिया।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 2029 से लागू करने की तैयारी

पीएम मोदी ने सभी दलों के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर कहा कि “व्यापक विमर्श के बाद हमने यह निर्णय किया है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पूरे देश में उसकी वास्तविक भावना के साथ लागू करने का समय आ गया है।” उन्होंने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनावों से महिला आरक्षण लागू होने से देश के लोकतांत्रिक संस्थानों में नई ऊर्जा आएगी और जन-विश्वास मजबूत होगा।

क्या है मूल कानून और क्यों चाहिए संशोधन?

2023 के संविधान संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। हालाँकि, यह आरक्षण 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन पूरा होने के बाद ही लागू होता, यानी 2034 से पहले इसे लागू नहीं किया जा सकता था। इसीलिए सरकार अब संशोधन लाकर इसे 2029 से ही प्रभावी बनाने की तैयारी कर रही है।

16 अप्रैल से विशेष संसद सत्र

महिला आरक्षण के क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित करते हुए 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है। भाजपा ने अपने सभी सांसदों के लिए 16 से 18 अप्रैल तक थ्री-लाइन व्हिप जारी किया है और कहा है कि सदन में उपस्थिति अनिवार्य है, किसी को भी अनुपस्थिति की अनुमति नहीं दी जाएगी।

विकसित भारत 2047 के सपने से जोड़ा

सम्मेलन में महिलाओं की भूमिका को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से जोड़ा गया। पंचायतों से लेकर संसद तक नेतृत्व में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित किया गया।

देशभर में भाजपा का ‘महिला संवाद’ अभियान

संसद सत्र से पहले भाजपा ने ‘महिला संवाद’ कार्यक्रम के ज़रिए देशभर में जन-जागरूकता अभियान तेज किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण महिलाओं को अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देना और उनकी राय जानना है।

राज्यों का समर्थन

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लैंगिक समानता की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम बताया और कहा कि महिलाओं की बढ़ी हुई राजनीतिक भागीदारी से शासन अधिक समावेशी और संतुलित बनेगा।

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