यह रकम क्या-क्या बदल सकती है?
अत्यधिक गरीबी का खात्मा: कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के दिसंबर 2025 के एक शोध के अनुसार, दुनिया से अत्यधिक गरीबी को लगभग 1 फीसदी तक कम करने के लिए हर साल 318 अरब डॉलर की जरूरत है। 1.25 ट्रिलियन डॉलर से यह काम करीब 4 साल तक लगातार किया जा सकता है। इसमें सीधे नकद हस्तांतरण, पोषण कार्यक्रम, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं—जो अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में पहले ही सफल साबित हो चुके हैं।
जलवायु संकट: यूएनएफसीसीसी की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, विकासशील देशों को जलवायु आपदाओं से उबरने और तैयारी के लिए 2030 तक हर साल 300-580 अरब डॉलर चाहिए। यह रकम कई सालों तक इस कमी को पूरा कर सकती है।
वैश्विक स्वास्थ्य: महामारी तैयारी के लिए सालाना 31 अरब डॉलर और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 100-275 अरब डॉलर की जरूरत है। 1.25 ट्रिलियन डॉलर से स्वास्थ्य व्यवस्थाएं मजबूत हो सकती हैं और लाखों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
ऑक्सफैम की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में अरबपतियों की संपत्ति 16 फीसदी बढ़कर 18.3 ट्रिलियन डॉलर हो गई, जो 2020 के मुकाबले 81 फीसदी ज्यादा है। वहीं, दुनिया की आधी आबादी किसी न किसी रूप में गरीबी में जी रही है।
फिर यह दान क्यों नहीं होता?
• ज्यादातर संपत्ति कंपनी शेयर्स में है, जिन्हें बड़ी मात्रा में बेचना मुश्किल है—बिक्री से कीमतें गिर जाएंगी और खुद उनकी संपत्ति घट जाएगी।
• वैश्विक संस्थाएं (जैसे यूएन) इतनी बड़ी रकम को एक साथ प्रभावी ढंग से खर्च करने की क्षमता नहीं रखतीं। नोबेल विजेता अर्थशास्त्रियों के शोध बताते हैं कि अचानक बड़ी राशि कमजोर संस्थानों को भ्रष्टाचार या अक्षमता की ओर धकेल सकती है।
• परोपकार के नियम भी धीमे हैं—अमेरिकी फाउंडेशन सालाना सिर्फ 5 फीसदी ही खर्च करते हैं।
• राजनीतिक प्रभाव भी बड़ी भूमिका निभाता है—अमीरों का धन नीतियों को प्रभावित करता है।
फिर भी, कल्पना कीजिए… अगर यह रकम उपलब्ध हो जाए तो परिवारों को बेहतर भोजन, शिक्षा और सुरक्षा मिलेगी। जलवायु आपदाओं से जल्दी उबरना संभव होगा और स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी। सबसे बड़ी बात—ये 10 लोग दान के बाद भी अरबपति रहेंगे, उनका जीवनस्तर नहीं बदलेगा।
यह काल्पनिक परिदृश्य एक सच्चाई उजागर करता है:
दुनिया में संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि उन्हें सही जगह पहुंचाने की इच्छाशक्ति और व्यवस्था की कमी है। फिलहाल इस मुद्दे पर कोई वास्तविक घोषणा या अपडेट नहीं है—यह विश्लेषण सिर्फ आंकड़ों पर आधारित विचार प्रयोग है।

