पश्चिम बंगाल में सियासी तूफान: टीएमसी-चुनाव आयोग की 7 मिनट की बैठक में ‘गेट लॉस्ट’ बनाम चिल्लाने के दावे, मतदाता सूची से 90 लाख नाम कटने पर विवाद तेज

पश्चिम बंगाल में सियासी तूफान: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और चुनाव आयोग (ईसी) के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। बुधवार (8 अप्रैल 2026) को हुई मात्र सात मिनट की बैठक में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे राजनीतिक घमासान और तेज हो गया है। टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उनकी टीम से “गेट लॉस्ट” (यहां से चले जाओ) कह दिया, जबकि चुनाव आयोग ने इसे खारिज करते हुए कहा कि टीएमसी प्रतिनिधियों ने चिल्लाकर व्यवस्था बिगाड़ी और शिष्टाचार का उल्लंघन किया।

बैठक का विवरण और आरोप-प्रत्यारोप

टीएमसी प्रतिनिधिमंडल (डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में) सुबह 10:02 बजे बैठक शुरू हुई और 10:07 बजे खत्म हो गई। ओ’ब्रायन ने कहा, “हमने मुख्य चुनाव आयुक्त से पूछा कि अधिकारी ट्रांसफर करके आप निष्पक्ष चुनाव कैसे कराएंगे? हमने ममता बनर्जी के लिखे नौ पत्रों का जिक्र किया, जिनका कोई जवाब नहीं आया। साथ ही नंदीग्राम में ईसी अधिकारियों और भाजपा समर्थकों के बीच कथित बैठक का मुद्दा उठाया। फिर उन्होंने हमें ‘लीव फ्रॉम हियर’ कह दिया।” उन्होंने बैठक का वीडियो या ऑडियो जारी करने की चुनौती भी दी और कहा कि यह “शर्मनाक” था।

चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन दावों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने बताया कि डेरेक ओ’ब्रायन ने चिल्लाकर मुख्य आयुक्त को बोलने नहीं दिया और कहा, “हम आपको सुनने नहीं आए हैं।” मुख्य आयुक्त ने शिष्टाचार बनाए रखने की अपील की, लेकिन प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी देकर बैठक से वॉकआउट कर दिया। ईसी ने एक्स पर साफ संदेश दिया: “पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव निडर, हिंसा-मुक्त, धमकी-मुक्त, प्रलोभन-मुक्त होंगे—बिना किसी चप्पा, बूथ जामिंग या सोर्स जामिंग के।” टीएमसी ने अब सीईसी के खिलाफ महाभियोग (इ impeach) की दिशा में कदम बढ़ाने की घोषणा की है और विरोधी दलों के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है।

मतदाता सूची से 90.66 लाख नाम कटने का विवाद

इस बैठक से पहले ही राज्य में मतदाता सूची संशोधन (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-एसआईआर) के दौरान 90.66 लाख नाम हटाए जाने पर भारी हंगामा मचा हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे भाजपा और ईसी की साजिश बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मटुआ और अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं को निशाना बनाया गया है। ममता ने दावा किया कि उनकी कोशिशों से 60 लाख विवादित मामलों में से 32 लाख मतदाताओं को सूची में शामिल कराया गया, लेकिन अब भी कई नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं।

ममता ने कहा कि उनके अपने भबानीपुर सीट से करीब 40,000 नाम कटे हैं, फिर भी वे जीतेंगी। उन्होंने प्रभावित लोगों से अपील की कि वे ट्रिब्यूनल में अपील करें और टीएमसी उनकी मदद करेगी। राज्य के कई जिलों (मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, मालदा, दक्षिण 24 परगना, नदिया आदि) में विरोध प्रदर्शन हुए हैं।

ममता ने भबानीपुर से नामांकन दाखिल किया

इसी बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे कोलकाता के सर्वे बिल्डिंग में भबानीपुर विधानसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल किया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ के बीच रैली निकालकर पहुंचीं। यह सीट उनके लिए खास महत्व रखती है, जहां वे भाजपा के सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ मैदान में हैं।

पृष्ठभूमि और बढ़ता तनाव

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची शुद्धिकरण, अधिकारी ट्रांसफर और निष्पक्ष चुनाव को लेकर टीएमसी और ईसी के बीच विवाद लंबे समय से चल रहा है। टीएमसी का आरोप है कि ईसी भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है, जबकि ईसी साफ-सुथरे और भय-मुक्त चुनाव कराने का दावा कर रहा है। इस घटनाक्रम से राज्य की राजनीति में नया तूफान खड़ा हो गया है और विपक्षी दलों के साथ मिलकर टीएमसी ईसी पर हमले तेज करने वाली है।

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