Vaishno Devi Medical College controversy: एनएमसी ने एमबीबीएस कोर्स की मान्यता रद्द की, जम्मू में जश्न तो कश्मीर में आक्रोश

Vaishno Devi Medical College controversy: जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) से नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने 2025-26 सत्र के लिए एमबीबीएस कोर्स की अनुमति वापस ले ली है। एनएमसी ने इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और क्लिनिकल सुविधाओं में गंभीर कमियों का हवाला दिया। इस फैसले के बाद जम्मू में दक्षिणपंथी संगठनों ने जश्न मनाया, जबकि कश्मीर के नेताओं ने इसे ‘‘शिक्षा का सांप्रदायिकीकरण’’ करार देते हुए तीखी आलोचना की।

विवाद की शुरुआत और एनएमसी का फैसला
कॉलेज ने इस साल पहली बार 50 एमबीबीएस सीटों के लिए दाखिले दिए थे, जिसमें NEET मेरिट के आधार पर 42-46 मुस्लिम छात्र (ज्यादातर कश्मीर घाटी से) चुने गए। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित इस संस्थान को हिंदू तीर्थयात्रियों की चढ़ावे की राशि से फंडिंग मिलती है।

दक्षिणपंथी संगठनों, खासकर श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति (लगभग 60 बीजेपी-आरएसएस से जुड़े संगठनों का छत्र संगठन) ने इसका विरोध किया। उनका तर्क था कि हिंदू चढ़ावे से बने कॉलेज में मुस्लिम छात्रों का दबदबा ‘‘अनुचित’’ है।
प्रदर्शनों के बाद एनएमसी ने 2 जनवरी को सरप्राइज इंस्पेक्शन किया और 6 जनवरी को लेटर ऑफ परमिशन (LoP) वापस ले लिया। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि चार महीने पहले (सितंबर 2025) दी गई अनुमति के समय सभी मानक पूरे थे, लेकिन यह इंस्पेक्शन ‘‘पूर्वनिर्धारित’’ लगता है। छात्रों को घर भेज दिया गया है और उनकी फीस लौटाई जा रही है।

छात्रों का भविष्य और आगे की योजना
एनएमसी ने निर्देश दिया है कि सभी 50 छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपरन्यूमेररी सीटों पर एडजस्ट किया जाए, अधिमानतः उनके घरों के करीब। जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन (BOPEE) इस प्रक्रिया को संभालेगा। सूत्रों के मुताबिक, 10-12 दिनों में छात्रों का नए कॉलेजों में दाखिला हो जाएगा। कॉलेज कमियों को दूर कर 2026-27 सत्र के लिए दोबारा आवेदन कर सकता है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: दो ध्रुवों पर बंटी राय
• कश्मीर और विपक्षी दलों का आक्रोश: पूर्व मुख्यमंत्री और PDP अध्यक्ष मेहबूबा मुफ्ती ने इसे ‘‘शिक्षा का सांप्रदायिकीकरण’’ बताया और कहा, ‘‘बीमारी का इलाज करने की बजाय मरीज को सजा दी जा रही है।’’ मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसे ‘‘जम्मू का नुकसान’’ करार दिया और प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहराया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी दार ने बीजेपी पर ‘‘खतरनाक राजनीति’’ का आरोप लगाया। पूर्व मेयर जुनैद अजीम मट्टू ने कहा, ‘‘यह भारत की समावेशिता और संविधान पर कलंक है।’’

• बीजेपी और दक्षिणपंथी संगठनों का स्वागत: बीजेपी नेता आरएस पठानिया ने इसे ‘‘गुणवत्ता पर जोर’’ बताया और कहा कि प्रभावित छात्रों को अन्य कॉलेजों में जगह मिलेगी। जम्मू में संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटीं और ढोल नगाड़ों पर नाच-गा कर जश्न मनाया। उनका कहना है कि मानकों का पालन जरूरी है।

विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों की राय
कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि विवाद के बाद इंस्पेक्शन और फैसला ‘‘प्रभावित’’ लगता है। मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉलेज ने पहले सभी सीटें ऑल इंडिया कोटा में डालने की कोशिश की थी, लेकिन असफल रहा। यह घटना जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय-धार्मिक विभाजन रेखा को फिर उजागर कर रही है।
यह विवाद मेरिट आधारित शिक्षा बनाम सांप्रदायिक भावनाओं के टकराव का प्रतीक बन गया है। आने वाले दिनों में छात्रों के पुनर्वास और कॉलेज की अगली कोशिशों पर सबकी नजर रहेगी।

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