उत्तर प्रदेश में एयरपोर्ट क्रांति डूबी: किसानों की उपजाऊ जमीन पर विकास का दांव, कई ‘भूत एयरपोर्ट’, 21 संचालित, 6 नए बंद, जेवर कल उद्घाटन

उत्तर प्रदेश में एयरपोर्ट क्रांति डूबी: उत्तर प्रदेश में कुल 32 एयरपोर्ट (बड़े एयरपोर्ट, सिविल एनक्लेव और एयरस्ट्रिप सहित) हैं, जिनमें 21 वर्तमान में ऑपरेशनल हैं। राज्य में 4 इंटरनेशनल एयरपोर्ट सक्रिय हैं – चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल (लखनऊ), लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल (वाराणसी), महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल (अयोध्या) और कुशीनगर इंटरनेशनल। कल 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का उद्घाटन होने जा रहा है, जिसके बाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट की संख्या 5 हो जाएगी। जेवर एशिया का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट होगा।

उड़ानें कहाँ चल रही हैं, कहाँ ठप?

सुचारू परिचालन वाले प्रमुख एयरपोर्ट: लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, गोरखपुर, कानपुर (सिविल), आगरा, बरेली, प्रयागराज, हिंदन और सहरनपुर जैसे बड़े और मध्यम एयरपोर्टों पर नियमित घरेलू व कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें सुचारू रूप से चल रही हैं। अयोध्या एयरपोर्ट UDAN स्कीम के तहत शुरू होने के बाद भी लगातार उड़ानें ले रहा है।

बंद या कगार पर: RTI (फरवरी 2026) के अनुसार 2021 के बाद शुरू हुए 7 नए UDAN एयरपोर्ट में से 6 पर अनुसूचित कमर्शियल उड़ानें बंद हो चुकी हैं – अलीगढ़, आजमगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती, मुरादाबाद और कुशीनगर इंटरनेशनल (नवंबर 2023 से बंद)। ये ‘भूत एयरपोर्ट’ बन गए हैं। कारण: कम यात्री ट्रैफिक, एयरलाइंस का न आना और ऑपरेशनल चुनौतियां। केवल अयोध्या इसमें अपवाद है।

कई छोटे एयरपोर्ट (अलीगढ़, आजमगढ़ आदि) नाम पर ऑपरेशनल हैं, लेकिन व्यावहारिक रूप से कोई नियमित फ्लाइट नहीं। कुछ एयरस्ट्रिप प्रशिक्षण या निजी उपयोग तक सीमित हैं।

जेवर एयरपोर्ट: किसानों की उपजाऊ जमीन पर क्यों बनाया गया?

जेवर (गौतम बुद्ध नगर) में 12,000 एकड़ से ज्यादा उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहण कर एयरपोर्ट बनाया गया है। किसानों को पहले चरण में 20 लाख प्रति बीघा और अब चौथे चरण में 40-45 लाख प्रति बीघा मुआवजा मिला। फिर भी कई किसानों ने मुआवजे का पैसा लग्जरी कारों, घरों और खर्च में उड़ा दिया और अब आय का स्रोत खत्म होने से परेशान हैं।

क्यों बनाया गया?

30-35 साल पुराना सपना: 1990 के दशक से दिल्ली एयरपोर्ट के बोझ को कम करने और NCR के पश्चिमी यूपी को वैश्विक हब बनाने की योजना थी।

आर्थिक विकास का इंजन: योगी सरकार ने 2017 के बाद तेजी दी। यह एयरपोर्ट रोजगार, कार्गो, MRO हब, पर्यटन और इंडस्ट्री को बढ़ावा देगा। पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्री क्षमता, बाद में एशिया का सबसे बड़ा।

राष्ट्रीय प्राथमिकता: केंद्र और राज्य सरकार की ‘डबल इंजन’ नीति का हिस्सा। UDAN स्कीम, रीजनल कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पुश का बड़ा प्रोजेक्ट। यूपी ने 2026-27 बजट में सिविल एविएशन के लिए ₹2,111 करोड़ आवंटित किए, जिसमें जेवर को बड़ा हिस्सा।

किसकी प्राथमिकता?

यह योगी आदित्यनाथ सरकार और केंद्र सरकार (मोदी सरकार) की संयुक्त प्राथमिकता है। यूपी को ‘मोस्ट प्रोएक्टिव स्टेट’ का नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है। लक्ष्य: 2026 तक 20+ ऑपरेशनल एयरपोर्ट और पूरे राज्य में हवाई कनेक्टिविटी। जेवर के साथ यूपी देश का एविएशन हब बनने जा रहा है, लेकिन छोटे एयरपोर्टों की सस्टेनेबिलिटी अभी चुनौती बनी हुई है।

जेवर का उद्घाटन विकास की नई उड़ान है, लेकिन किसानों की जमीन और बंद पड़े एयरपोर्ट याद दिलाते हैं कि विकास के साथ रोजगार, मुआवजे और डिमांड प्लानिंग का संतुलन जरूरी है। कल का उद्घाटन देखेगा कि यूपी की एविएशन कहानी कितनी ऊंची उड़ान भरती है।

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