US withdraws from 66 international organizations: ट्रंप प्रशासन का वैश्विक सहयोग से और पीछे हटना, भारत-फ्रांस की अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन से भी निकला

US withdraws from 66 international organizations: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका की सदस्यता और फंडिंग समाप्त करने का आदेश दिया है। यह कदम ट्रंप प्रशासन की उस नीति का हिस्सा है जिसमें वैश्विक सहयोग को कम करके अमेरिकी हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। इनमें से अधिकांश संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े एजेंसी, कमीशन और सलाहकार पैनल हैं जो जलवायु परिवर्तन, श्रम अधिकार और विविधता से जुड़े मुद्दों पर काम करते हैं, जिन्हें ट्रंप प्रशासन “वोक” (woke) पहल करार देता है।

ट्रंप ने 7 जनवरी को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सदस्यता और फंडिंग की समीक्षा के बाद 66 संस्थाओं से बाहर निकलने का फैसला लिया गया। अमेरिकी विदेश विभाग ने बयान में कहा, “ये संस्थाएं अनावश्यक, कुप्रबंधित, व्यर्थ या अमेरिकी संप्रभुता और समृद्धि के लिए खतरा हैं। कई तो ऐसे हितों के अधीन हैं जो अमेरिकी हितों के विपरीत हैं।”

भारत-नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन से भी बाहर
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका भारत और फ्रांस द्वारा शुरू किए गए अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance – ISA) से भी बाहर हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने 2015 में पेरिस जलवायु सम्मेलन में इसका शुभारंभ किया था। यह गठबंधन सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विकासशील देशों में सहयोग करता आ रहा है। अमेरिका का बाहर निकलना भारत के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह गठबंधन अब तक 100 से अधिक देशों का समर्थन प्राप्त कर चुका है।

जलवायु समझौतों पर बड़ा झटका
अमेरिका संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) से भी बाहर हो रहा है। यह 1992 का वह समझौता है जिस पर पेरिस जलवायु समझौता आधारित है। ट्रंप पहले ही पेरिस समझौते से बाहर निकल चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका जैसे बड़े उत्सर्जक देश का बाहर निकलना वैश्विक जलवायु प्रयासों को कमजोर करेगा और अन्य देशों को अपनी प्रतिबद्धताएं टालने का बहाना देगा।

इसके अलावा जनसंख्या से जुड़ी UN एजेंसी (UNFPA) से भी फंडिंग पूरी तरह बंद हो रही है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी इस एजेंसी पर चीन में “जबरन गर्भपात” में सहयोग का आरोप लगाकर फंडिंग रोकी गई थी, हालांकि बाद की जांचों में ऐसे कोई सबूत नहीं मिले थे।

अन्य प्रमुख संगठन जिनसे अमेरिका बाहर हो रहा है
• कार्बन फ्री एनर्जी कॉम्पैक्ट
• संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय (UN University)
• अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति
• अंतरराष्ट्रीय उष्णकटिबंधीय लकड़ी संगठन
• अटलांटिक सहयोग साझेदारी
• पैन-अमेरिकन भूगोल और इतिहास संस्थान
• अंतरराष्ट्रीय कला परिषद और संस्कृति एजेंसी महासंघ
• अंतरराष्ट्रीय सीसा और जस्ता अध्ययन समूह

विदेश विभाग ने कहा कि और संगठनों की समीक्षा जारी है। कुल मिलाकर 31 UN-संबद्ध और 35 गैर-UN संस्थाओं से बाहर निकला जा रहा है।

पहले भी कई संगठनों से बाहर हो चुका अमेरिका
ट्रंप प्रशासन पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए UNRWA, UN मानवाधिकार परिषद और UNESCO से बाहर निकल चुका है या फंडिंग रोक चुका है। यह नीति “अमेरिका फर्स्ट” की तर्ज पर है, जिसमें केवल वे अंतरराष्ट्रीय प्रयास समर्थित हैं जहां अमेरिका का प्रत्यक्ष लाभ हो या चीन के प्रभाव को रोका जा सके, जैसे दूरसंचार, समुद्री और श्रम संगठनों में।

विशेषज्ञों और पर्यावरण वैज्ञानिकों का मानना है कि ये कदम वैश्विक चुनौतियों – जैसे जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और गरीबी – से निपटने में बाधा डालेंगे। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए सौर ऊर्जा और जलवायु फंडिंग में अमेरिकी योगदान की कमी प्रभाव डालेगी। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

यह फैसला ट्रंप के उस रुख का हिस्सा है जिसमें वे वैश्विक संस्थाओं को अमेरिकी हितों के अनुरूप बनाने पर जोर दे रहे हैं।

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