अमेरिकी सांसदों का उमर खालिद को समर्थन: दंगे मामले को लेकर लिखा पत्र, जमानत और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप निष्पक्ष मुकदमे की मांग की

अमेरिकी सांसदों का उमर खालिद को समर्थन: आठ अमेरिकी सांसदों ने भारत में 2020 दिल्ली दंगों के कथित बड़े षड्यंत्र मामले में आरोपी कार्यकर्ता उमर खालिद के लिए जमानत और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निष्पक्ष एवं समयबद्ध मुकदमे की मांग करते हुए भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को पत्र लिखा है।

30 दिसंबर 2025 की तारीख वाले इस पत्र में सांसदों ने उमर खालिद की रिहाई और उनके तथा उनके सह-आरोपियों के खिलाफ चल रही न्यायिक कार्यवाही में अंतरराष्ट्रीय मानकों के पालन की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी है।
पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में डेमोक्रेटिक पार्टी के जिम मैकगवर्न (टॉम लैंटोस मानवाधिकार आयोग के सह-अध्यक्ष), जेमी रास्किन, भारतीय मूल की प्रमिला जयपाल, जान शाकोव्स्की, लॉयड डॉगेट, रशीदा तलीब तथा सीनेटर क्रिस वैन होलेन और पीटर वेल्च शामिल हैं।

जिम मैकगवर्न ने इस पत्र को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए बताया कि उन्होंने और रास्किन ने दिसंबर में उमर खालिद के माता-पिता से मुलाकात की थी। पत्र में कहा गया है कि उमर खालिद पांच वर्षों से अधिक समय से UAPA के तहत बिना जमानत के जेल में हैं और स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह कानून कानून के समक्ष समानता, उचित प्रक्रिया और समानुपातिकता के अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन कर सकता है।

सांसदों ने भारत सरकार से अपील की है कि वह व्यक्ति को उचित समय में मुकदमा या रिहाई का अधिकार तथा दोष सिद्ध होने तक निर्दोष मानने के सिद्धांत का पालन सुनिश्चित करे।
इसके अलावा, न्यूयॉर्क शहर के नव-निर्वाचित मेयर जोहरान मामदानी ने भी उमर खालिद को याद करते हुए एक अलग संदेश लिखा, जिसे उनके माता-पिता को सौंपा गया। मामदानी ने लिखा, “मैं आपके कड़वाहट न पालने संबंधी शब्दों को बार-बार याद करता हूं। आपके माता-पिता से मिलकर खुशी हुई। हम सब आपको याद कर रहे हैं।”

उमर खालिद को सितंबर 2020 में दंगा, आपराधिक षड्यंत्र, गैरकानूनी जमावड़ा और UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। हाल ही में दिल्ली की करकड़डूमा कोर्ट ने उन्हें बहन की शादी में शामिल होने के लिए 16 से 29 दिसंबर तक अंतरिम जमानत दी थी, जिसमें सोशल मीडिया उपयोग और परिवार-रिश्तेदारों के अलावा किसी से मिलने पर पाबंदी थी। उनकी नियमित जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

यह घटनाक्रम उमर खालिद के मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है। अभी तक भारतीय सरकार या राजदूत की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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