अमेरिका-ईरान युद्ध: ईरान के शहीद ने ढाया अमेरिका-इजऱायल पर कहर, ट्रम्प पड़े अलग -थलग, NATO पर तीखा हमला

अमेरिका-ईरान युद्ध: अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य अभियान में ईरान के खिलाफ कार्रवाई के दौरान 12 से ज्यादा MQ-9 रीपर ड्रोन्स नष्ट हो गए हैं। प्रत्येक ड्रोन की कीमत करीब 16 मिलियन डॉलर है। यूएस अधिकारियों ने एबीसी न्यूज को इसकी पुष्टि की। ईरानी मिसाइलों या जमीनी हमलों में ये ड्रोन्स तबाह हुए। ये ड्रोन्स टोही के साथ-साथ हेलफायर मिसाइलों से हमला करने में सक्षम हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सबसे पहले इसकी रिपोर्ट दी थी।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 28 फरवरी 2026 को ईरान के खिलाफ “मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस” की घोषणा की थी। पहले दिन ही ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई, उनकी जगह उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने पद संभाला। ईरान ने जवाबी हमले में इजराइल, अमेरिकी बेस और खाड़ी देशों (यूएई, सऊदी अरब, कतर) पर मिसाइल-ड्रोन दागे। ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक करने की कोशिश कर रहा है, जिससे दुनिया के एक-चौथाई तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं।

ट्रंप ने NATO सहयोगियों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की, लेकिन जर्मनी, ब्रिटेन समेत अधिकांश सहयोगियों ने मना कर दिया। जर्मन डिफेंस मिनिस्टर बोरेस पिस्टोरियस ने कहा, “यह हमारा युद्ध नहीं है, हम इसमें नहीं फंसेंगे।” ट्रंप ने ओवल ऑफिस में आयरलैंड के प्रधानमंत्री से मुलाकात में NATO को “बहुत मूर्खतापूर्ण गलती” बताते हुए कहा, “हम उन्हें जरूरत नहीं समझते, लेकिन वे वहां होने चाहिए थे। हमने कभी उनकी मदद नहीं मांगी।” ट्रंप ने यूक्रेन को अमेरिकी समर्थन का हवाला देते हुए कहा कि यह अमेरिका के लिए “अनफेयर” है। उन्होंने चीन से भी मदद मांगी, लेकिन चीन ने तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की। जिसके कारण ट्रंप ने अपना चीन दौरा भी टाल दिया।

ट्रंप ने दावा किया कि एक पूर्व राष्ट्रपति (जिस पार्टी को वे “ट्रंप डेरेंजमेंट सिंड्रोम” वाली बताते हैं) ने उनसे कहा, “काश मैंने यह किया होता।” लेकिन एबीसी न्यूज के सूत्रों के अनुसार, जीवित तीन डेमोक्रेटिक पूर्व राष्ट्रपति—जो बाइडेन, बराक ओबामा और बिल क्लिंटन—ने ट्रंप से ईरान मुद्दे पर कोई बात नहीं की।ओबामा के सहयोगी ने कहा कि हाल की मुलाकातों (ट्रंप के उद्घाटन और जिमी कार्टर के अंतिम संस्कार) के बावजूद ईरान पर चर्चा नहीं हुई। क्लिंटन और बाइडेन के सर्कल से भी यही पुष्टि हुई।

पेंटागन ने मिडिल ईस्ट में 2,200 मरीन की 31st मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट तैनात करने का फैसला लिया है। यह कदम ग्राउंड ट्रूप्स की संभावना को बढ़ा रहा है, जो युद्ध को नई ऊंचाई दे सकता है। यूनिट को मिडिल ईस्ट पहुंचने में दो हफ्ते लग सकते हैं। ईरान की ओर से IRGC ने बासिज कमांडर घोलामरेजा सोलेमानी की मौत की पुष्टि की, जो इजराइल-अमेरिका हमले में हुई। ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी भी मारे गए। इजराइल लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ पोजीशन मजबूत कर रहा है।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को NATO की जरूरत नहीं, युद्ध “मिलिट्री सक्सेस” है। लेकिन राष्ट्रीय काउंटरटेररिज्म सेंटर डायरेक्टर जो केंट ने विरोध में इस्तीफा दे दिया। डीएनआई टुलसी गब्बर्ड ने ट्रंप के फैसले का समर्थन किया। यह युद्ध ईरान की सस्ती ड्रोन्स (शाहिद) की वजह से चुनौतीपूर्ण बन गया है, जो अमेरिकी-इजराइली ठिकानों पर असरदार साबित हो रहे हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलना आसान नहीं, क्योंकि ईरान ड्रोन और मिसाइलों से हमले कर रहा है। स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। तेल कीमतों में उछाल और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर दिखने लगा है। अमेरिका में गैसोलीन की कीमतें 3.79 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई हैं। आगे क्या होगा, यह ट्रंप प्रशासन के अगले कदमों पर निर्भर करेगा।

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