सूरजपुर जिला न्यायालय में हंगामा: वकीलों ने पुलिस की एंट्री पर लगाया बैन, बिसरख पुलिस के खिलाफ आर-पार की जंग

सूरजपुर जिला न्यायालय में हंगामा: गौतमबुद्ध नगर जिला न्यायालय परिसर आज एक बार फिर रणक्षेत्र में तब्दील नजर आया। थाना बिसरख पुलिस और स्थानीय वकीलों के बीच छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आक्रोशित अधिवक्ताओं ने आज सामूहिक रूप से निर्णय लेते हुए कोर्ट परिसर के भीतर पुलिस कर्मियों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध (Ban) लगा दिया है।

विवाद की मुख्य वजह: अधिवक्ता की कथित पिटाई और अवैध हिरासत

इस पूरे विवाद की जड़ थाना बिसरख पुलिस की एक कार्रवाई है। जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता फरीद के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा अभद्रता और मारपीट का मामला सामने आया है। वकीलों का आरोप है कि:

  • पुलिस ने फरीद नामक वकील को न केवल पीटा, बल्कि उन्हें अवैध रूप से हिरासत में भी रखा।
  • गिरफ्तारी के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया।
  • साथी वकील के साथ हुए इस व्यवहार को बार एसोसिएशन ने अपनी गरिमा पर हमला माना है।

कोर्ट में आमने-सामनेपुलिस और वकील

आज सुबह जैसे ही कचहरी की कार्यवाही शुरू हुई, भारी संख्या में वकील मुख्य द्वारों पर जमा हो गए। वकीलों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को परिसर से बाहर जाने को कह दिया। इस दौरान स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब कुछ पुलिस अधिकारियों ने अंदर जाने का प्रयास किया, जिसे वकीलों ने पुरजोर तरीके से रोक दिया।

बार एसोसिएशन का कड़ा रुख

गौतमबुद्ध नगर बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त निलंबन और कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। वकीलों का कहना है कि पुलिस अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर न्याय के रक्षकों को ही निशाना बना रही है।

सुरक्षा और न्यायिक कार्य प्रभावित

पुलिस की एंट्री बैन होने से कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ा है। वहीं, इस हंगामे और विरोध प्रदर्शन के कारण कोर्ट में आने वाले वादकारियों (मुकदमे लड़ने वालों) को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों की सुनवाई टल गई है और न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप नजर आ रहा है।

ताजा स्थिति: खबर लिखे जाने तक, जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी वकीलों के प्रतिनिधियों से वार्ता कर मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वकील दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।

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