लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियां तेज हो गई हैं और इसी कड़ी में आज प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची (UP Voter List 2025) जारी की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा यह सूची सार्वजनिक करेंगे। इस फाइनल लिस्ट में करीब 2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं, जिससे लाखों मतदाताओं में बेचैनी का माहौल है।
क्या है पूरा मामला?
गत 6 जनवरी को जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल थे। निर्वाचन आयोग ने इस सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए 6 मार्च तक का समय दिया था। इस अवधि में प्राप्त दावों और आपत्तियों का निराकरण करने के बाद अब अंतिम सूची तैयार की गई है। आयोग के अनुमान के मुताबिक इस फाइनल लिस्ट में कुल 13.35 करोड़ मतदाताओं के नाम होने की उम्मीद है।
नए नाम जुड़े, पुराने भी हटे
आंकड़ों पर नजर डालें तो मतदाता सूची में नए नाम जुड़वाने के लिए 86.69 लाख लोगों ने फॉर्म-6 भरा। वहीं दूसरी तरफ नाम कटवाने के लिए 3.18 लाख लोगों ने फॉर्म-7 जमा किया। इन आवेदनों की जांच और डेटा सत्यापन के बाद अंतिम सूची तैयार की गई है।
क्यों हट रहे हैं 2 करोड़ नाम?
मतदाता सूची से इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने की सबसे प्रमुख वजह पारिवारिक मिलान यानी फैमिली मैचिंग का न होना बताई जा रही है। इसके अलावा तकनीकी खामियां भी एक बड़ा कारण हैं। जांच के दौरान 2.22 करोड़ मामलों में डेटा में गड़बड़ियां पाई गईं। करीब 1.04 करोड़ मतदाताओं को पारिवारिक मिलान न होने के आधार पर नोटिस जारी किए गए थे। इन्हीं आधारों पर अब लगभग 2 करोड़ नाम सूची से हटाए जा सकते हैं।
पश्चिमी यूपी पर सबसे ज्यादा असर
सूत्रों के मुताबिक सबसे ज्यादा नाम पश्चिमी उत्तर प्रदेश से काटे जाने की आशंका है। यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है और यहां से बड़ी संख्या में नाम हटने की स्थिति में चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। इसको लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों में भी हलचल देखी जा रही है।
क्या करें अगर आपका नाम न हो?
यदि कोई मतदाता अपना नाम सूची में नहीं पाता है तो वह निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना नाम जांच सकता है और आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म-6 भरकर पुनः आवेदन कर सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि सूची जारी होते ही सभी नागरिक अपना नाम तुरंत जांच लें। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में यह अंतिम मतदाता सूची राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है और इसे लेकर सभी प्रमुख दलों की नजरें टिकी हुई हैं।

