लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आयोजित सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा में एक बहुविकल्पीय प्रश्न के उत्तर में ‘पंडित’ शब्द के उपयोग ने प्रदेश की राजनीति और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस विवाद के बाद उत्तर प्रदेश सरकार और भर्ती बोर्ड (UPPRPB) ने न केवल कड़ी कार्रवाई की है, बल्कि भविष्य के लिए ‘शून्य सहिष्णुता’ (Zero Tolerance) की नई गाइडलाइन्स भी जारी की हैं।
1. विवाद की जड़: क्या था वो सवाल?
14 मार्च को संपन्न हुई परीक्षा के हिंदी प्रश्नपत्र में ‘अनेकार्थी शब्दों’ या ‘वाक्यांश के लिए एक शब्द’ से संबंधित एक प्रश्न पूछा गया था:
- प्रश्न: “समय और परिस्थिति के अनुसार खुद को बदल लेने वाले व्यक्ति को क्या कहेंगे?”
- विकल्प: (A) अवसरवादी, (B) पंडित, (C) निष्कपट, (D) सदाचारी।
हालाँकि व्याकरण की दृष्टि से उत्तर ‘अवसरवादी’ सही माना जाता है, लेकिन विकल्प में ‘पंडित’ शब्द का समावेश विद्वत्ता के प्रतीक इस शब्द को नकारात्मक संज्ञा देने के रूप में देखा गया। सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र की फोटो वायरल होते ही ब्राह्मण संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे सनातन संस्कृति और एक विशेष समुदाय का अपमान करार दिया।
2. मुख्यमंत्री का सख्त निर्देश और नई गाइडलाइन्स
विवाद के तूल पकड़ते ही मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भर्ती बोर्ड को तलब करते हुए निम्नलिखित सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- प्रश्नपत्रों की ‘सेंसिटिव ऑडिटिंग’: अब से किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने के बाद एक ‘विशेषज्ञ समिति’ (Expert Committee) उन प्रश्नों की संवेदनशीलता की जाँच करेगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी धर्म, जाति, लिंग या संप्रदाय की भावनाओं को ठेस न पहुँचे।
- एजेंसी पर ब्लैकलिस्ट की तलवार: जिस बाहरी एजेंसी ने यह पेपर सेट किया था, उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। दोषी पाए जाने पर उस एजेंसी को उत्तर प्रदेश की सभी आगामी परीक्षाओं से ‘ब्लैकलिस्ट’ कर दिया जाएगा और भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
- विवादास्पद प्रश्न को हटाना: भर्ती बोर्ड ने घोषणा की है कि इस विशेष प्रश्न को मूल्यांकन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। इसके अंक सभी परीक्षार्थियों को समान रूप से दिए जाएंगे या कुल पूर्णांक में से इसे घटा दिया जाएगा।
3. ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: जब परीक्षाओं में मचा बवाल
प्रतियोगी परीक्षाओं में इस तरह की चूक का इतिहास काफी पुराना और विवादित रहा है:
| परीक्षा एवं वर्ष | विवाद का मुख्य कारण | परिणाम/कार्रवाई |
|---|---|---|
| MPPSC (2020) | भील जनजाति को ‘शराबी’ और ‘कर्जखोर’ बताने वाला गद्यांश। | भारी विरोध, आयोग ने माफी मांगी और प्रश्न हटाया। |
| HSSC हरियाणा (2018) | ब्राह्मणों को ‘अपशकुन’ से जोड़ने वाला सवाल पूछा गया। | आयोग के चेयरमैन सस्पेंड हुए, एजेंसी ब्लैकलिस्ट हुई। |
| UP पुलिस (2018/21) | जातिगत पहचान और महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी। | कोर्ट में मामला पहुँचा और सुधार के निर्देश दिए गए। |
| BPSC (बिहार) | महापुरुषों की जाति या उनके निजी जीवन पर विवादित सवाल। | छात्रों के आंदोलन के बाद सवाल डिलीट किए गए। |
4. भर्ती बोर्ड का पक्ष: क्यों होती हैं ऐसी गलतियाँ?
भर्ती बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पेपर सेट करने की प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय होती है। “बोर्ड के अधिकारी पेपर को तब तक नहीं देख सकते जब तक परीक्षा शुरू न हो जाए। हम एजेंसियों को केवल पाठ्यक्रम (Syllabus) देते हैं। यह एजेंसी के ‘कंटेंट राइटर्स’ की चूक है जो सामाजिक संवेदनशीलता को नहीं समझते।”
एक सकारात्मक बदलाव की ओर
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल युग में अब परीक्षा केवल ज्ञान की नहीं, बल्कि बोर्ड की सतर्कता की भी है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘सेंसिटिव ऑडिटिंग’ का निर्णय भविष्य में ऐसे विवादों को रोकने के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

