BJP district executive committee embroiled in controversy: अयोध्या में हत्या के प्रयास का आरोपी बना महामंत्री, लखनऊ में सरकारी टीचर को मीडिया प्रभारी

BJP district executive committee embroiled in controversy: उत्तर प्रदेश भाजपा की नवगठित जिला कार्यकारिणियाँ घोषित होते ही विवादों के घेरे में आ गई हैं। यूपी भाजपा ने कड़ी मशक्कत के बाद जिला कार्यकारिणी बनाई। 2 मार्च तक बनने वाली यह कार्यकारिणी 21 मार्च को घोषित हो सकी — यानी 19 दिन की देरी। इसके बावजूद घोषित होते ही यह विवादों में घिर गई।

अयोध्या में सबसे चौंकाने वाला मामला

सबसे चौंकाने वाला मामला अयोध्या महानगर का है। यहाँ भाजपा ने शिवेंद्र सिंह को जिला महामंत्री बनाया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार शिवेंद्र पर हत्या के प्रयास और मारपीट के मुकदमे दर्ज हैं और वह फैजाबाद जिले के टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल हैं। इसके अलावा शिवेंद्र को सपा के बागी विधायक अभय सिंह का करीबी भी बताया जाता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार जिले के वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली और लखनऊ तक आपत्ति जताई थी, लेकिन प्रदेश स्तर के एक पदाधिकारी के दबाव में शिवेंद्र को महामंत्री बना दिया गया। इस पर अयोध्या महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव ने कहा कि मुकदमा दर्ज होने से कोई अपराधी नहीं हो जाता और जाँच चल रही है।

लखनऊ में सेवा नियमों की अनदेखी

लखनऊ जिला टीम में चिंतामणि पांडेय को मीडिया प्रभारी बनाया गया है, जबकि वह बाराबंकी के हैदरगढ़ में एक प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हैं। शिक्षा विभाग के सेवा नियमों के अनुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल का पदाधिकारी नहीं बन सकता। उल्लेखनीय है कि चिंतामणि को 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी का प्रचार करने के आरोप में निलंबित भी किया जा चुका है। बाराबंकी के बेसिक शिक्षा अधिकारी का स्पष्ट कहना है कि यह सेवा नियमों के खिलाफ है और कोई भी परिषदीय शिक्षक किसी राजनीतिक दल का पदाधिकारी नहीं बन सकता।

महिलाओं और आरक्षित वर्गों की अनदेखी

भाजपा की गाइडलाइन के अनुसार जिला कार्यकारिणी में कम से कम 7 महिला पदाधिकारी अनिवार्य हैं, लेकिन ललितपुर को छोड़कर किसी भी जिले में यह कोरम पूरा नहीं किया गया। इसी तरह दलित-ओबीसी प्रतिनिधित्व के नियमों की भी कई जिलों में अनदेखी हुई।

गोरखपुर क्षेत्र अभी भी इंतजार में

काशी, ब्रज, पश्चिम, अवध और कानपुर क्षेत्र के करीब 65 से अधिक जिलों की कार्यकारिणी घोषित हो चुकी है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर के जिलों में अभी तक कार्यकारिणी का गठन नहीं हुआ।

विपक्ष का पलटवार

इस पूरे विवाद पर विपक्षी दलों ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जो पार्टी “अपराधमुक्त राजनीति” का दावा करती है, वही अपनी जिला इकाइयों में हिस्ट्रीशीटरों को पद दे रही है। इससे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के संगठनात्मक ढाँचे पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।​​​​​​​​​​​​​​​​

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