UP Becomes a ‘Semiconductor Hub: उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्रांति को नई उड़ान देते हुए आज यमुना एक्सप्रेसवे के सेक्टर-28 में प्रदेश की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट की आधारशिला रखी गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रिमोट का बटन दबाकर इस मेगा प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया। ₹3,706 करोड़ के निवेश वाला यह प्रोजेक्ट भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का हिस्सा है और इसे इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड (HCL और फॉक्सकॉन का JV) द्वारा स्थापित किया जा रहा है।
दिग्गज नेताओं की उपस्थिति में शक्ति प्रदर्शन
कार्यक्रम के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के कई दिग्गज चेहरे एक साथ नजर आए। समारोह में केंद्रीय IT एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके साथ ही:
- जतिन प्रसाद, MSME मंत्री (उत्तर प्रदेश)
- डॉ. महेश शर्मा, सांसद (गौतम बुद्ध नगर)
- पंकज सिंह, विधायक (नोएडा)
- धीरेन्द्र सिंह, विधायक (जेवर)
- तेजपाल नागर, विधायक (दादरी)
- तथा भाजपा के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस ऐतिहासिक समारोह को संबोधित किया।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं और प्रभाव
यह प्लांट न केवल यूपी बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
- कुल निवेश: ₹3,706 करोड़।
- क्षेत्रफल: यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-28 में 48 एकड़ जमीन।
- उत्पादन क्षमता: यहाँ हर महीने 20,000 वेफर्स का उत्पादन होगा, जो मोबाइल, लैपटॉप और ऑटोमोबाइल के लिए डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स बनाएंगे।
- रोजगार के अवसर: इस यूनिट से करीब 3,780 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।
“यूपी में कानून का राज और विकास की रफ़्तार”: CM योगी
शिलान्यास के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के विकास की गाथा सुनाई। उन्होंने कहा:
“आज का उत्तर प्रदेश ‘बीमारू राज्य’ की छवि से बाहर निकलकर ‘निवेश के स्वर्ग’ में तब्दील हो चुका है। जेवर एयरपोर्ट और इस सेमीकंडक्टर प्लांट के आने से यह पूरा क्षेत्र दुनिया के नक्शे पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बनेगा।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि यूपी में बेहतर कानून-व्यवस्था और पारदर्शी नीतियों के कारण ही आज फॉक्सकॉन जैसी वैश्विक कंपनियां यहाँ निवेश कर रही हैं।
निष्कर्ष
जेवर एयरपोर्ट के नजदीक बन रहा यह प्लांट ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल भारत की विदेशों से चिप आयात करने की निर्भरता कम होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर हाई-टेक सप्लाई चेन भी विकसित होगी।

