बेमौसम बारिश और आंधी का कहर: देश के कई राज्यों में इस सप्ताह बेमौसम बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में रबी की फसलें — खासकर गेहूं, चना, मसूर और सरसों — जो कटाई के ऐन मुहाने पर थीं, वे खेतों में ही बिछ गईं है। अन्नदाताओं के लिए यह मार दोहरी है क्योंकि कई किसान अभी तक पिछले साल की बाढ़ और धान की बर्बादी से उबर भी नहीं पाए थे।
कहां-कहां हुई तबाही?
मथुरा के नंदगांव इलाके में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दीं। तेज आंधी और बारिश के कारण सैकड़ों एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल जमीन पर बिछ गई, जिससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
मध्य प्रदेश में जनवरी से फरवरी 2026 के बीच रुक-रुककर हुई बारिश और ओलावृष्टि से सैकड़ों हेक्टेयर में गेहूं, आलू और दलहन की फसलें बर्बाद हुई हैं। भोपाल के आसपास सीहोर, रायसेन और विदिशा में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर के किसानों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा।
बरेली के मीरगंज तहसील क्षेत्र में तेज हवा के कारण खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जगह-जगह गिर गई। किसानों का कहना है कि इससे तीस से चालीस प्रतिशत तक पैदावार कम हो सकती है। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के बरठीं और आसपास के क्षेत्रों में कुछ जगहों पर करीब 70 से 80 प्रतिशत तक फसल प्रभावित हुई है।
किसानों की दर्दभरी दास्तां
मथुरा के किसान कुंपी पहलवान, नरवीर और जसमत ने बताया कि इस बार की फसल से उन्हें काफी उम्मीदें थीं, लेकिन अचानक आए मौसम ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। श्रावस्ती के किसान रामसमुझ, गुड्डू और आदर्श मिश्रा ने बताया कि बारिश से गेहूं के दाने छोटे हो सकते हैं और इससे बाजार मूल्य भी प्रभावित होगा। साथ ही सरसों की फलियां टूट गई हैं जिससे उत्पादन और घटेगा। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के किसान सोहेल अंसारी ने कहा कि बारिश और हवा से फसलों का काफी नुकसान हुआ है और इसकी भरपाई के लिए उचित मुआवजा मिलना चाहिए। किसान नूतन कुमार ने कहा कि पहले हाथी खेतों में घुसकर फसल बर्बाद करते थे, अब बारिश और हवा ने बाकी बची फसल भी तबाह कर दी।
राज्य सरकारों का रुख — सर्वे के आदेश, मुआवजे की घोषणाएं
मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसलें बर्बाद होने के बाद राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर मुआवजा दिए जाने की घोषणा कर रही हैं और अधिकारियों को सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं। हरियाणा सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल (ekshatipurti.haryana.gov.in) के जरिये फसल नुकसान का विवरण दर्ज कराने की व्यवस्था की है। जिन किसानों का रजिस्ट्रेशन ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर है, उन्हें ही मुआवजा मिलेगा।
उत्तराखंड में किसानों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फसलों के नुकसान का उचित मुआवजा दिलाने की मांग उठाई है। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर में किसान नेता जगतार सिंह बाजवा ने चेतावनी दी है कि अगर नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो किसान आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। उन्होंने किसानों से कर्ज वसूली पर भी रोक लगाने की मांग की है।
पीएम फसल बीमा योजना — एक उम्मीद की किरण
मध्य प्रदेश में पीएम फसल बीमा योजना के तहत एक युवा किसान दुर्गेश कुमार को सोयाबीन की बर्बाद फसल के एवज में सिर्फ 10 दिनों के भीतर 30,000 रुपये की सहायता राशि मिल गई। अब रबी सीजन में बेमौसम बारिश से खराब हुई फसल का भुगतान भी जल्द होने की उम्मीद जताई जा रही है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मार्च के महीने में इस तरह की बेमौसम बारिश और आंधी का सिलसिला बढ़ता जा रहा है, जो रबी की कटाई के लिए सबसे संवेदनशील समय होता है। किसान संगठनों की मांग है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) से विशेष पैकेज जारी करे और प्रभावित किसानों का जल्द से जल्द गिरदावरी सर्वे कराया जाए।
किसानों से अपील: जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, वे अपने राज्य के संबंधित पोर्टल पर या नजदीकी पटवारी/लेखपाल से संपर्क कर नुकसान की सूचना तुरंत दर्ज कराएं, ताकि सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया में देरी न हो।

