यूपी-दिल्ली में 250 कार चोरी करने वाले गिरोह के दो सदस्य दबोचे

Ghaziabad news  स्वाट टीम और मोदीनगर पुलिस ने लग्जरी गाड़ियों की चोरी करने वाले गैंग के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। दोनों मेरठ के रहने वाले हैं।
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह में 20 से अधिक लोग शामिल हैं और यह गैंग अब तक 250 से ज्यादा कारें चोरी कर यूपी, दिल्ली और हरियाणा में बेच चुका है।
एसीपी मोदीनगर भास्कर वर्मा ने बताया कि आरोपियों के पास से स्कॉर्पियो समेत तीन कारें बरामद की गई हैं। गिरोह के सदस्य फर्जी नंबर प्लेट और फर्जी आरसी तैयार कर वाहनों को बेचते थे।
आरोपी हरेंद्र उर्फ हनी ने बताया कि वह मूल रूप से मेरठ का रहने वाला है और वर्तमान में दिल्ली के खजूरी खास में किराये के मकान में रहकर वाहन चोरों का गैंग चलाता था। वर्ष 2014 में थाना इंदिरापुरम, गाजियाबाद क्षेत्र में रेड लाइट पर खड़ी गाड़ियों से मोबाइल चोरी के मामले में वह जेल गया था।
जेल से छूटने के बाद वह सोतीगंज, मेरठ निवासी गोल्डी सरदार के पास 12 हजार रुपये प्रतिमाह पर ड्राइवर का काम करने लगा। इसी दौरान उसकी दोस्ती जीतू, उमरदराज और मेहराज (मकबरा डिग्गी, मेरठ) से हुई और इनके साथ मिलकर चार पहिया वाहन चोरी की घटनाओं में शामिल हो गया। इस मामले में वह थाना परतापुर, मेरठ से भी जेल जा चुका है।
आरोपी ने बताया कि वर्ष 2021 में कोतवाली देहात, बुलंदशहर से अपने गैंग के साथ गिरफ्तार होकर जेल गया था। जेल से छूटने के बाद वह फिर सक्रिय हो गया और गाजियाबाद व दिल्ली के कई थानों से वाहन चोरी के मामलों में जेल जा चुका है।
साल 2025 में थाना इंदिरापुरम से फॉर्च्यूनर चोरी के मामले में जेल जाने के बाद वह जमानत पर बाहर आया था। जमानत पर आने के बाद उसने मोदीनगर क्षेत्र से स्कॉर्पियो-एन चोरी की और दिल्ली के रोहिणी, सागरपुर और मॉडल टाउन समेत कई इलाकों में साथियों के साथ लगातार चार पहिया वाहन चोरी की वारदातें कीं। मोदीनगर से चोरी स्कॉर्पियो-एन को राजस्थान में बेचा गया था।
चोरी की कारें गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली में होती थी सप्लाई
दूसरे आरोपी अमित चौधरी ने बताया कि वह चोरी की कारों को गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली में सप्लाई करता था। उसने पिछले पांच वर्षों में 50 से अधिक गाड़ियां इन राज्यों में बेची हैं।आरोपियों ने बताया कि गिरोह फॉर्च्यूनर कार को करीब 4 लाख रुपये, स्कॉर्पियो को 3 लाख रुपये और हुंडई व मारुति की कारों को करीब 60 हजार रुपये में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और दिल्ली में बेचता था। चोरी की गाड़ियों से मिलने वाली रकम को गैंग के सदस्य आपस में बराबर बांट लेते थे।

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