Two attacks on the Trump administration: चुनावों पर ‘राष्ट्रीय आपात’ का अध्यादेश और एपस्टीन फाइल्स में ‘कवर-अप’ का आरोप

Two attacks on the Trump administration: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशासन पर एक साथ दो बड़े विवादों ने राजधानी को हिला दिया है। एक तरफ प्रो-ट्रंप वकील एक अध्यादेश (एक्जीक्यूटिव ऑर्डर) का मसौदा तैयार कर रहे हैं, जिसमें 2020 चुनाव में कथित चीनी हस्तक्षेप का हवाला देकर ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ घोषित कर चुनाव प्रक्रिया पर ट्रंप को व्यापक नियंत्रण देने की मांग की गई है। वहीं दूसरी तरफ शीर्ष डेमोक्रेटिक नेताओं ने अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी और न्याय विभाग (DOJ) पर जेफ्री एपस्टीन फाइल्स को ‘छुपाने’ का गंभीर आरोप लगाया है। दोनों मुद्दे 2026 के मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले ट्रंप प्रशासन की पारदर्शिता और शक्ति संतुलन पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

चुनाव अध्यादेश की मांग: वोटर आईडी, हैंड-काउंटिंग, मेल-इन बैन
एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, फ्लोरिडा के वकील पीटर टिकटिन के नेतृत्व में प्रो-ट्रंप वकीलों का एक समूह 17 पेज का मसौदा तैयार कर चुका है। इसमें 2020 चुनाव में ‘चीनी कम्युनिस्ट पार्टी’ के हस्तक्षेप (जिसके कोई सबूत अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने नहीं पाए) का हवाला देकर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने का प्रावधान है।
इसके तहत पूरे देश में अनिवार्य होगा:
• वोटर आईडी
• केवल हैंड-काउंटेड पेपर बैलट
• मेल-इन वोटिंग पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध (सैनिक, विकलांग, बीमार या यात्रा पर छूट)
• इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का बहिष्कार

ट्रंप ने इस मसौदे की कई संस्करणों की समीक्षा की है और 13 फरवरी को सोशल मीडिया पर लिखा था कि वे “कानूनी तर्कों की गहराई खोजकर” वोटर आईडी और नो मेल-इन बैलट के लिए ‘अचूक’ तर्क पेश करेंगे—चाहे कांग्रेस मंजूर करे या न करे। माइकल फ्लिन, माइपिलो सीईओ माइक लिंडेल, पैट्रिक बर्ने और स्टीव बैनन जैसे सहयोगी इस अभियान में सक्रिय हैं। टिकटिन ने कहा, “मशीनें हटाना सबसे जरूरी है… प्राइमरी से पहले ASAP होना चाहिए।”

डेमोक्रेट्स ने इसे संवैधानिक उल्लंघन बताया। हाउस माइनॉरिटी लीडर हाकीम जेफ्रीज ने कहा, “ट्रंप चुनाव चुराना चाहते हैं, इसलिए राष्ट्रीयकरण कर रहे हैं।” रेप. टेड लियू ने चेतावनी दी कि अदालतें इसे ठुकरा देंगी, जैसा टैरिफ वाले मामले में हुआ। व्हाइट हाउस ने कहा कि यह सिर्फ ‘बाहरी सुझाव’ है। एपस्टीन फाइल्स में कवर-अप का आरोप
इसी बीच, 26 फरवरी को कैपिटल हिल पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीनेट माइनॉरिटी लीडर चक शूमर, रेप. रॉबर्ट गार्सिया और सीनेटर डिक डर्बिन ने बॉन्डी और DOJ पर ‘मासिव कवर-अप’ का आरोप लगाया।

नवंबर 2025 में ट्रंप द्वारा साइन किए गए ‘एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट’ के तहत DOJ को सभी फाइल्स 30 दिनों में सार्वजनिक करना था। डेमोक्रेट्स का दावा है कि: ट्रंप पर लगे आरोपों वाली फाइल्स (2019 में एक महिला के FBI इंटरव्यू, जिसमें कहा गया कि 1980 के दशक में नाबालिग होने पर ट्रंप और एपस्टीन ने उसका यौन शोषण किया) को गायब कर दिया गया या रोका गया है। रेडक्शन नियमों का उल्लंघन कर नग्न तस्वीरें और व्यक्तिगत जानकारी जारी की गई। लाखों पेज देर से जारी किए गए।

गार्सिया ने कहा, “यह अविश्वसनीय, अवैध है। पाम बॉन्डी और राष्ट्रपति को जवाब देना होगा कि बाकी फाइल्स कहां हैं।” शूमर ने चेतावनी दी, “हम हर थ्रेड खींचेंगे, व्हिसलब्लोअर्स से बात करेंगे।” DOJ ने तुरंत जवाब दिया कि फ्लैग की गई फाइल्स की समीक्षा चल रही है और यदि अनुचित रूप से रोकी गईं तो जारी की जाएंगी। विभाग ने कहा कि 500 से ज्यादा वकीलों ने पीड़ितों के साथ समन्वय कर रेडक्शन किया है। ट्रंप ने हमेशा इन आरोपों से इनकार किया है।

दोनों विवादों का मेल
दोनों घटनाएं 2026 मिडटर्म से पहले ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर सवाल उठा रही हैं—एक तरफ चुनाव प्रक्रिया को ‘सुरक्षित’ करने का दावा, दूसरी तरफ पुराने स्कैंडल को पारदर्शी रखने में कथित विफलता। डेमोक्रेट्स इसे ‘पावर ग्रैब और छुपाने की साजिश’ बता रहे हैं, जबकि रिपब्लिकन इसे ‘डेमोक्रेट्स का राजनीतिक हमला’ कहते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अध्यादेश जारी हुआ तो अदालती लड़ाई अनिवार्य है, जबकि एपस्टीन फाइल्स पर कांग्रेस की ओवरसाइट बढ़ेगी। फिलहाल दोनों मुद्दों पर नजरें टिकी हैं—कोई नया विकास तुरंत राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।

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